राज्य किसान योजना लिस्ट 2026 — किस राज्य में कितना पैसा मिलता है?
Manish Kumar · अपडेटेड: 17/08/2026
PM Kisan का ₹6,000 तो पूरे देश में एक जैसा है। असली फर्क इस बात से पड़ता है कि आपका खेत किस राज्य की सीमा के अंदर है। राजस्थान का किसान साल में ₹9,000 तक पहुंचता है, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र का ₹12,000, और आंध्र प्रदेश का ₹20,000 तक। जमीन वही, मेहनत वही — रकम में इतना अंतर सिर्फ नक्शे की लकीर से।
यह पेज उसी अंतर का पूरा हिसाब एक जगह रखता है: किस राज्य में कौन सी योजना, कितना पैसा, और स्थिति देखने का सीधा रास्ता। हर राज्य का अलग विस्तृत गाइड भी है — लिंक टेबल में और हर सेक्शन में मिलेगा। शुरुआत करने से पहले एक बात साफ कर दें: नीचे का हर आंकड़ा उस राज्य की सरकारी घोषणा या आधिकारिक पोर्टल से मिलाया गया है, कोई भी नंबर WhatsApp फॉरवर्ड से नहीं लिया गया।
पूरी तस्वीर एक टेबल में — राज्य, योजना, रकम
“कुल सालाना” वाले कॉलम में PM Kisan का ₹6,000 जोड़कर लिखा है, क्योंकि किसान के खाते में साल भर में यही जोड़ पहुंचता है।
| राज्य | योजना | राज्य का हिस्सा | कुल सालाना (PM Kisan मिलाकर) | गाइड |
| मध्य प्रदेश | CM किसान कल्याण योजना | ₹6,000 / साल (3 × ₹2,000) | ₹12,000 | पूरा गाइड |
| राजस्थान | मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि | ₹3,000 / साल (3 × ₹1,000) | ₹9,000 | पूरा गाइड |
| महाराष्ट्र | नमो शेतकरी महासन्मान निधि | ₹6,000 / साल (2 × ₹3,000) | ₹12,000 | पूरा गाइड |
| आंध्र प्रदेश | अन्नदाता सुखीभवा | ₹14,000 तक राज्य का हिस्सा | ₹20,000 तक | पूरा गाइड |
| तेलंगाना | रायतु भरोसा | ₹12,000 / एकड़ / साल | जमीन के हिसाब से | पूरा गाइड |
| पश्चिम बंगाल | कृषक बंधु | ₹4,000–₹10,000 / साल (जमीन पर स्लैब) | ₹16,000 तक | पूरा गाइड |
| ओडिशा | CM किसान योजना | ₹4,000 / साल (भूमिहीन: ₹12,500) | ₹10,000 | पूरा गाइड |
| छत्तीसगढ़ | कृषक उन्नति योजना | धान खरीदी पर अंतर राशि (फिक्स नहीं) | बिक्री के हिसाब से | पूरा गाइड |
हर राज्य का छोटा हिसाब — कौन, कितना, कैसे
मध्य प्रदेश — मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना
राज्य केंद्र के बराबर ₹6,000 सालाना देता है, तीन किस्तों में। अलग आवेदन नहीं देना पड़ता — सूची PM Kisan के डेटा से बनती है, इसलिए वहां का रिकॉर्ड जिंदा रहना ही असली शर्त है। स्थिति SAARA पोर्टल (saara.mp.gov.in) पर दिखती है और गिरदावरी का रिकॉर्ड यहां खास मायने रखता है। पूरा तरीका MP वाले गाइड में है, और इसका हिंदी संस्करण यहां।
राजस्थान — मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि
जून 2026 में मुख्यमंत्री कार्यालय की घोषणा के मुताबिक राज्य का हिस्सा बढ़कर ₹3,000 सालाना हो गया — यानी केंद्र के ₹6,000 मिलाकर कुल ₹9,000। यहां का दरवाजा जन आधार है; वह बैंक खाते से जुड़ा नहीं तो किश्त अटकती है। किस्तें अक्सर PM Kisan की किस्त के साथ ही, अलग एंट्री में आती हैं। पूरा हिसाब राजस्थान गाइड और उसके हिंदी संस्करण में।
महाराष्ट्र — नमो शेतकरी महासन्मान निधि
PM Kisan के पात्र लाभार्थी को राज्य ₹6,000 और देता है — कुल ₹12,000 सालाना। अलग आवेदन नहीं, सूची केंद्रीय डेटा से बनती है। यहां का सबसे जरूरी कागज 7/12 उतारा है। स्थिति देखने का रास्ता नमो शेतकरी गाइड में है (हिंदी में यहां पढ़िए)।
आंध्र प्रदेश — अन्नदाता सुखीभवा
फिक्स रकम वाली योजनाओं में देश का सबसे बड़ा पैकेज — केंद्र का हिस्सा मिलाकर साल का ₹20,000 तक। और इसकी सबसे अलग बात: CCRC कार्ड वाले पंजीकृत बटाईदार भी इसमें आते हैं, जो लगभग किसी और राज्य में नहीं होता। किस्तों का सीजन-वार हिसाब AP गाइड में है, हिंदी में यहां।
तेलंगाना — रायतु भरोसा
यहां हिसाब प्रति एकड़ चलता है: हर एकड़ खेती-योग्य जमीन पर ₹12,000 सालाना — ₹6,000 खरीफ में, ₹6,000 रबी में। दो एकड़ वाले को चार एकड़ वाले से आधा मिलता है, इसलिए गांव में हर खाते की रकम अलग दिखती है। भूमिहीन खेत-मजदूरों के लिए इंदिराम्मा आत्मीय भरोसा नाम का अलग ट्रैक भी है। जमीन का रिकॉर्ड (भू भारती) यहां सब कुछ तय करता है — पूरा हिसाब रायतु भरोसा गाइड और हिंदी गाइड में।
पश्चिम बंगाल — कृषक बंधु
जमीन के स्लैब पर ₹4,000 से ₹10,000 सालाना, दो किस्तों में (खरीफ + रबी)। पहचान का मुख्य जरिया आधार नहीं, वोटर कार्ड (EPIC) है — यह पूरे देश में अनोखा सिस्टम है। साथ में ₹2 लाख का डेथ बेनिफिट भी जुड़ा है। स्लैब का पूरा गणित और EPIC से स्थिति देखने का तरीका कृषक बंधु गाइड में, हिंदी में यहां।
ओडिशा — CM किसान योजना
KALIA की जगह आई योजना। छोटे-सीमांत किसान को ₹4,000 सालाना (नुआखाई + अक्षय तृतीया पर), और भूमिहीन कृषि परिवारों के लिए अलग ट्रैक पर ₹12,500 — भूमिहीन को पैसा देने वाला यह गिने-चुने राज्यों में है। दोनों ट्रैक की सूचियां अलग होती हैं, यह फर्क समझना यहां सबसे जरूरी है। पूरा तरीका ओडिशा गाइड में, हिंदी में यहां।
छत्तीसगढ़ — कृषक उन्नति योजना
इस सूची की सबसे हटके योजना — फिक्स सालाना रकम नहीं मिलती। पैसा धान की सरकारी खरीदी से जुड़ा है: MSP और ₹3,100 प्रति क्विंटल के बीच की अंतर राशि किसान के खाते में आती है, यानी जितना धान बेचा, उतना हिसाब। खरीफ 2026 से धान छोड़कर दूसरी फसल लगाने पर ₹15,000 प्रति एकड़ इनपुट सहायता का नया रास्ता भी खुला है। पूरा गणित कृषक उन्नति गाइड में है।
जिन राज्यों में सीधी नकद योजना नहीं — वहां क्या है?
उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, कर्नाटक जैसे कई बड़े राज्यों में PM Kisan जैसी अलग सालाना नकद-सहायता योजना अभी नहीं चल रही। मेरे एक परिचित बिहार के हैं — पड़ोसी राज्य की किस्त की खबर पढ़कर हर बार पूछते हैं कि हमारा नंबर कब आएगा। जवाब यह है कि इन राज्यों में मदद का मॉडल ही अलग है:
- बिहार — DBT Agriculture पोर्टल एक छाता है: डीजल अनुदान (₹750 प्रति एकड़ प्रति सिंचाई तक), कृषि इनपुट अनुदान, बीज अनुदान — सब एक ही 13 अंकों के पंजीकरण से। पूरा सिस्टम बिहार गाइड में समझाया है।
- हरियाणा — नकद योजना की जगह MSP खरीद का मजबूत सिस्टम: मेरी फसल मेरा ब्योरा पर पंजीकरण के बिना मंडी में फसल नहीं बिकती। तरीका हरियाणा गाइड में।
- कर्नाटक — फसल नुकसान पर परिहार (मुआवजा) सिस्टम चलता है, FRUITS ID से। विस्तार परिहार गाइड में।
- उत्तर प्रदेश — 2017 की किसान कर्ज राहत (₹1 लाख तक माफी) के बचे मामले निपट रहे हैं; नई सालाना नकद योजना नहीं है। ईमानदार हिसाब UP गाइड में।
- गुजरात — iKhedut पोर्टल से ट्रैक्टर, ड्रिप, मशीनरी जैसी दर्जनों सब्सिडी मिलती हैं — सालाना नकद नहीं, आवेदन-आधारित सहायता। पूरा तरीका iKhedut गाइड में।
इन राज्यों के किसान के लिए सलाह दो लाइन की है: PM Kisan का रिकॉर्ड दुरुस्त रखिए (यही आधार है — मास्टर गाइड यहां), और अपने कृषि विभाग की साइट पर चालू योजनाओं का पेज देखते रहिए। नए बजट के साथ नई योजनाएं आती रहती हैं — जब भी किसी राज्य में नई नकद-सहायता योजना शुरू होगी, हम यह पेज अपडेट कर देंगे।
राज्य का पैसा केंद्र के ऊपर कैसे जुड़ता है — तीन बातें
पूरे सिस्टम को समझने की चाबी एक ही है: राज्य की योजना PM Kisan की जगह नहीं लेती, उसके ऊपर जुड़ती है। केंद्र अपना ₹6,000 तीन किस्तों में भेजता है; राज्य अपना हिस्सा अपने शेड्यूल पर, अपनी ट्रेजरी से भेजता है। दो अलग मशीनें, एक ही खाता।
इसी से तीन बातें निकलती हैं। पहली — दोनों की किस्तें कभी एक साथ नहीं आतीं; 15–30 दिन का फर्क आम है, घबराने की बात नहीं। दूसरी — एक रुक जाए तो दूसरी अपने आप नहीं रुकती; दोनों के कारण अपने-अपने होते हैं। तीसरी — MP और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सूची केंद्रीय डेटा से बनती है, इसलिए वहां e-KYC का एक्सपायर होना दोनों किस्तें एक साथ रोक देता है। डबल नुकसान।
मैंने खुद बैंक स्टेटमेंट में यह फर्क देखा है — PM Kisan का क्रेडिट “PMKISAN” के रेफरेंस से आता है और राज्य वाला अलग एंट्री में। महीने में दो अलग क्रेडिट दिखना बिल्कुल सामान्य है, इसे गलती मत समझिए।
जांच से पहले तीन चीजें — राज्य कोई भी हो
पोर्टल चाहे कोई भी हो, पैसा अटकने की वजहें लगभग वही रहती हैं। पहली: बैंक खाता NPCI से आधार-सीड हो — फोटोकॉपी जमा करना काफी नहीं, शाखा से सीधा पूछिए कि सीडिंग हुई या नहीं। दूसरी: आधार, बैंक और जमीन के रिकॉर्ड में नाम की स्पेलिंग एक जैसी हो। तीसरी: e-KYC चालू हालत में हो — यह वाली सबसे धोका देती है, स्क्रीन पर सब हरा दिखता है और पैसा फिर भी नहीं आता। पैसा अटके तो पहले पेमेंट फेल होने वाला गाइड देख लीजिए — ज्यादातर मामले वहीं सुलझ जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
PM Kisan और राज्य की योजना — दोनों का पैसा एक साथ मिल सकता है?+
सबसे ज्यादा पैसा किस राज्य में मिलता है?+
मेरा राज्य (UP/बिहार/हरियाणा/पंजाब) इस सूची में क्यों नहीं है?+
राज्य बदलकर दूसरी जगह बस गया हूं — पुरानी किस्त मिलती रहेगी?+
बटाईदार (किराए पर खेती करने वाले) को भी राज्य की योजना का पैसा मिलता है?+
राज्य की योजना के लिए अलग से फॉर्म भरना पड़ेगा या अपने आप नाम जुड़ जाएगा?+
यह लेख State Kisan Yojana List (Hinglish) का हिंदी संस्करण है। PM Kisan की पूरी जानकारी के लिए मास्टर गाइड पढ़िए।
Disclaimer:रकम और नियम हर राज्य के कैबिनेट फैसलों से बदल सकते हैं। अंतिम जानकारी के लिए अपने राज्य की आधिकारिक साइट या कृषि कार्यालय से पुष्टि करें।
