रायथु भरोसा स्थिति — बंधु से भरोसा तक, ₹12,000 प्रति एकड़ का हिसाब
Manish Kumar · अपडेटेड: 16/08/2026
फोन पर सबसे पहला सवाल यही आता है — “भाई, रायथु बंधु और रायथु भरोसा एक ही चीज है क्या?” नहीं है। और जब तक यह फर्क साफ न हो, स्थिति देखना भी उलझन ही बढ़ाता है। तो पहले दो मिनट में यही गांठ खोलते हैं, फिर पैसे और पोर्टल की बात।
रायथु बंधु बनाम रायथु भरोसा — असली फर्क
रायथु बंधु 2018 में शुरू हुई थी और 2024 तक चली — बीआरएस सरकार की योजना, प्रति एकड़ ₹5,000 हर मौसम। दिसंबर 2023 में सरकार बदली, और नई कांग्रेस सरकार ने 26 जनवरी 2025 को संक्रांति के मौके पर इसकी जगह रायथु भरोसा शुरू की। नाम भर नहीं बदला — रकम बढ़ी और शर्तें कड़ी हुईं।
| बात | रायथु बंधु (पुरानी) | रायथु भरोसा (चालू) |
|---|---|---|
| अवधि | 2018 – 2024 | 26 जनवरी 2025 से |
| प्रति एकड़ रकम | ₹10,000 सालाना (₹5,000 × 2 मौसम) | ₹12,000 सालाना (₹6,000 × 2 मौसम) |
| किस जमीन पर | रिकॉर्ड में दर्ज हर जमीन — बिना जांचे | सिर्फ खेती-योग्य जमीन, सैटेलाइट से सत्यापित |
| एकड़ की सीमा | कोई सीमा नहीं | कोई सीमा नहीं — पर गैर-कृषि जमीन बाहर |
शर्तें कड़ी क्यों हुईं, इसका जवाब सरकारी समीक्षा में है। पुरानी योजना में रियल एस्टेट के प्लॉट, सड़कों और पहाड़ी टीलों तक पर पैसा जाता रहा — छह साल में करीब ₹25,672 करोड़ ऐसी गैर-कृषि जमीन पर चले जाने का अनुमान सरकारी समीक्षा में सामने आया था। इसीलिए अब भुगतान से पहले जमीन का खेती-योग्य होना जांचा जाता है।
अभी तक कब-कब पैसा गया — दर्ज तारीखें
अंदाजे की तारीखों से दूर रहिए — यहां सिर्फ वही तारीखें हैं जो जारी हो चुकी किस्तों की हैं।
रबी (यासंगी) 2025-26: पहला चरण 22 मार्च 2026 से शुरू हुआ — मुख्यमंत्री ने सिद्दिपेट जिले के नर्मेट्टा गांव से इसकी शुरुआत की। कुल करीब ₹9,000 करोड़ तीन चरणों में गए, लगभग 70 लाख किसानों को, करीब 1.43 करोड़ एकड़ पर। पहले चरण में हर पात्र किसान को पहले एक एकड़ का ₹6,000 दिया गया (₹3,590 करोड़), बाकी रकम अगले चरणों में अप्रैल के आखिर तक पहुंची।
खरीफ (वानाकालम) 2026: 30 जून 2026 से जारी — शुरुआत खम्मम जिले के मदिरा से हुई। तेलंगाना राज्य पोर्टल (telangana.gov.in) पर दर्ज इस रिलीज में करीब 73 लाख किसानों के लिए ₹9,000 करोड़ मंजूर हुए, और भुगतान नौ चरणों में 10 जुलाई 2026 तक पूरा हुआ।
इन दो किस्तों से एक बात पकड़ लीजिए — हर बार पैसा चरणों में जाता है, और चरण पूरा होने में एक-दो हफ्ते लग जाते हैं। यही इस योजना की आधी घबराहट की जड़ है।
पड़ोसी को आया, आपको नहीं — पहले यह पढ़िए
मेरे एक परिचित वारंगल की तरफ के हैं। खरीफ की किस्त के समय गांव के आधे खातों में पैसा आ गया, उनके में नहीं। वे MRO दफ्तर जाने की तैयारी कर चुके थे कि दो दिन बाद अपने आप क्रेडिट आ गया — उनका मंडल बस अगले चरण में था।
किस मंडल का नंबर पहले आता है, यह मोटे तौर पर तीन चीजों से तय होता है:
- जिन इलाकों के जमीन रिकॉर्ड पूरी तरह अपडेट हैं, वहां का भुगतान पहले निकलता है।
- जिन किसानों का बैंक खाता आधार और एनपीसीआई से पहले से जुड़ा है, उनकी रकम शुरुआती चरण में चली जाती है।
- आदिवासी इलाकों में पोडु जमीन के अधिकार जांचने में समय लगता है, इसलिए वहां के चरण बाद में आते हैं।
मतलब — स्थिति में “Processing” दिखे तो पैसा अटका नहीं है, आपके मंडल का चरण आना बाकी है। हड़बड़ी में दफ्तर के चक्कर काटने से पहले एक हफ्ता रुकना समझदारी है।
स्थिति देखने का तरीका
हाथ में तीन चीजें रखिए — पट्टादार पासबुक (उसमें खाता नंबर और जमीन का रकबा लिखा होता है), आधार कार्ड, और बैंक पासबुक। फिर:
- मोबाइल के ब्राउजर में योजना का पोर्टल खोलिए — rytubharosa.cgg.gov.in। मैंने खुद पोर्टल खोल कर देखा तो मेनू तेलुगु और अंग्रेजी में मिलते हैं, पर नतीजा नंबरों में दिखता है — हिंदीभाषी के लिए भी काम चल जाता है।
- होमपेज पर “Rythu Bharosa Status” या “Beneficiary Status” पर जाइए।
- आधार नंबर से खोजिए — खाता नंबर से भी होता है, पर आधार से नतीजा ज्यादा भरोसेमंद आता है।
- कैप्चा भरकर Submit कीजिए।
- सामने नाम, गांव-मंडल-जिला, जमीन का रकबा और भुगतान की स्थिति (Sanctioned / Disbursed / Pending) दिखेगी।
गांव की सूची में नाम ढूंढना
लगे कि नाम ही छूट गया है, तो गांव की पूरी लाभार्थी सूची देख लीजिए। पोर्टल के Reports वाले हिस्से में जिला, मंडल और गांव चुनकर, फिर वित्तीय वर्ष और मौसम (खरीफ/रबी) चुनकर सूची निकलती है — उसमें गांव भर के नाम, ढके हुए खाता नंबर और रकम दिखती है। सूची निकालने का यही तरीका हमने पीएम किसान की लाभार्थी सूची वाली गाइड में तस्वीरों के साथ समझाया है — ढांचा वहां का भी लगभग यही है।
चरण निकल गया, फिर भी खाता खाली — अब असली जांच
यहां से मामला “रुकिए” से आगे बढ़कर “कुछ ठीक कराइए” पर आ जाता है।
1. भू भारती (पुराना धरणी) का रिकॉर्ड
योजना की सूची सीधे राजस्व रिकॉर्ड से बनती है। तेलंगाना में जमीन का यह रिकॉर्ड पहले धरणी पोर्टल पर था, जिसे अब भू भारती नाम दिया गया है। जमीन हाल में खरीदी या विरासत में मिली हो और नामांतरण दर्ज न हुआ हो, तो पैसा पुराने मालिक के नाम पर बनता रहेगा। यह रायथु भरोसा की सबसे बड़ी और सबसे आम रुकावट है — MRO दफ्तर में नामांतरण की अर्जी लगाइए और उसकी पावती लेकर रखिए।
2. बैंक खाते की आधार सीडिंग
भुगतान एनपीसीआई मैपिंग से होता है — खाता सिर्फ खुला होना काफी नहीं, आधार से जुड़ा और सक्रिय होना चाहिए। बंद पड़े या डॉर्मेंट खाते में गई रकम लौट जाती है। शाखा में जाकर सीडिंग की स्थिति पुछवाइए — पांच मिनट का काम है। यही दिक्कत पीएम किसान में भी सबसे ज्यादा पैसे रोकती है, जिसका पूरा इलाज पीएम किसान मास्टर गाइड में लिखा है।
3. जमीन का खेती-योग्य दर्ज न होना
नई शर्तों में सैटेलाइट से जांच होती है। जमीन रिकॉर्ड में खेती-योग्य नहीं दिखती — मसलन उस पर ले-आउट कट गया है या वह गैर-कृषि दर्ज हो गई है — तो भुगतान नहीं बनेगा। यह गलती कागज पर हुई हो तो सुधार राजस्व दफ्तर से ही होगा।
4. वन अधिकार (RoFR) पट्टे का सत्यापन
RoFR पट्टे वाले किसान योजना के दायरे में हैं, पर उनके पट्टे का सत्यापन अलग से चलता है और समय लेता है। पट्टा साथ लेकर मंडल कृषि अधिकारी से अपने खाते की सथिति लिखित में पूछ लीजिए — मौखिक जवाब पर मत लौटिए।
यह भी जान लीजिए — भूमिहीन और धान वाले
दो बातें जो इस योजना के साथ नत्थी हैं, पर अलग हैं। पहली — भूमिहीन खेत मजदूरों के लिए इंदिराम्मा आत्मीय भरोसा नाम की जुड़ी हुई योजना है, जिसमें ₹12,000 सालाना मिलते हैं। जमीन नहीं है तो रायथु भरोसा की सूची में नाम ढूंढने के बजाय इसकी पात्रता पूछिए। दूसरी — धान की उपज पर ₹500 प्रति क्विंटल का बोनस अलग से है, जो जिला पोर्टलों पर दर्ज व्यवस्था है।
और हां — recieve होने वाली हर किस्त का SMS संभालकर रखिए, शिकायत के समय तारीख और रकम का यही सबसे तेज सबूत होता है।
अंग्रेजी-हिंदी मिली-जुली भाषा में पढ़ना हो तो इसी विषय की Rythu Bharosa Status Check की विस्तृत गाइड भी है, जिसमें पोर्टल के स्क्रीन दर स्क्रीन कदम दिए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रायथु बंधु और रायथु भरोसा — दोनों में पैसा किसका ज्यादा है?
रायथु भरोसा का। पुरानी रायथु बंधु में प्रति एकड़ ₹10,000 सालाना मिलते थे (₹5,000 खरीफ + ₹5,000 रबी)। जनवरी 2025 से लागू रायथु भरोसा में यह बढ़कर ₹12,000 प्रति एकड़ सालाना हो गया — यानी ₹6,000 हर मौसम। तेलंगाना के जिला पोर्टलों पर यही आंकड़ा दर्ज है। हां, चुनाव में ₹15,000 का वादा था, लेकिन लागू दर ₹12,000 ही है।
मेरे पड़ोसी को पैसा आ गया, मुझे नहीं — क्या मेरा नाम कट गया?
जरूरी नहीं। भुगतान पूरे राज्य में एक दिन में नहीं होता — चरणों (phases) में होता है। खरीफ 2026 की किस्त 30 जून से 10 जुलाई के बीच नौ चरणों में गई थी। आपका मंडल बाद के चरण में हो सकता है। एक-दो हफ्ते रुकिए, स्थिति पोर्टल पर देखते रहिए। चरण निकल जाने के बाद भी पैसा न आए, तब जाकर बात अलग है।
जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ है — पहले क्या ठीक कराऊं?
सबसे पहले भू भारती (पुराना नाम धरणी) पोर्टल का रिकॉर्ड। रायथु भरोसा की सूची सीधे इसी रिकॉर्ड से बनती है — जमीन खरीदी या विरासत में मिली हो और नामांतरण (mutation) न हुआ हो, तो पैसा पुराने मालिक की ओर जाता रहेगा। MRO दफ्तर जाकर पहले रिकॉर्ड दुरुस्त कराइए, स्थिति अपने आप पटरी पर आ जाएगी।
मेरे पास अपनी जमीन नहीं है, मजदूरी करता हूं — मुझे कुछ मिलेगा?
तेलंगाना सरकार ने भूमिहीन खेत मजदूरों के लिए अलग व्यवस्था रखी है — इंदिराम्मा आत्मीय भरोसा, जिसमें ₹12,000 सालाना मिलते हैं। यह रायथु भरोसा से जुड़ी हुई पर अलग योजना है, इसलिए इसकी सूची और शर्तें भी अलग हैं। अपने गांव के पंचायत सचिव या मंडल कृषि कार्यालय से इसकी पात्रता पूछिए।
धान बोने पर कोई अलग फायदा है क्या?
है। जिला पोर्टलों (जैसे mulugu.telangana.gov.in) के मुताबिक धान की उपज पर ₹500 प्रति क्विंटल का बोनस अलग से दिया जाता है। यह रायथु भरोसा की प्रति-एकड़ रकम के ऊपर है। बोनस बिक्री के रिकॉर्ड से जुड़ता है, इसलिए धान सरकारी खरीद केंद्र पर बेचने की पर्ची संभालकर रखिए।
