कृषक बंधु स्थिति — वोटर कार्ड से किस्त और ₹2 लाख का हिसाब
Manish Kumar · अपडेटेड: 16/08/2026
देश की लगभग हर किसान योजना आधार नंबर से खुलती है। पश्चिम बंगाल की कृषक बंधु (বাংলা में কৃষক বন্ধু) उलटी चाल चलती है — यहां पहचान की असली चाबी है वोटर कार्ड, यानी EPIC नंबर। यही इस योजना की सबसे अलग बात है, और स्थिति देखते समय सबसे ज्यादा अटकने की जगह भी यही है। तो सीधे वहीं से शुरू करते हैं।
वोटर कार्ड से स्थिति — पांच कदम
- ब्राउजर में सरकारी पोर्टल खोलिए — krishakbandhu.wb.gov.in। मिलते-जुलते नाम की .com/.net वाली निजी साइटों पर मत जाइए।
- होमपेज पर नথিভুক্ত কৃষকের তথ্য / Search Farmer Information वाला हिस्सा चुनिए — नाम बांग्ला-अंग्रेजी में दिखता है, घबराइए मत, काम नंबर से चलता है।
- खोज के विकल्प में Voter ID / EPIC चुनिए। आधार, मोबाइल नंबर और acknowledgement नंबर के विकल्प भी होते हैं, पर EPIC सबसे भरोसेमंद बैठता है क्योंकि रजिस्ट्रेशन उसी से बंधा है।
- EPIC नंबर हूबहू कार्ड जैसा भरिए — तीन अंग्रेजी अक्षर, फिर सात अंक, बीच में कोई स्पेस नहीं।
- कैप्चा भरकर खोजिए — नाम, गांव, ब्लॉक, दर्ज जमीन का रकबा और मौजूदा स्थिति सामने आ जाएगी।
नतीजे वाले पन्ने का स्क्रीनशॉट लेकर रख लीजिए। बाद में ब्लॉक कृषि कार्यालय में बात करनी पड़े तो यही सबसे काम का कागज होता है।
पैसा कितना — जमीन के हिसाब से
रकम खेती-योग्य जमीन के रकबे से तय होती है, पर नीचे एक फर्श और ऊपर एक छत — दोनों लगे हैं। योजना का झुकाव छोटे किसान की तरफ है।
| जमीन | सालाना रकम | किस्तें |
|---|---|---|
| 1 एकड़ या ज्यादा | ₹10,000 | ₹5,000 (खरीफ) + ₹5,000 (रबी) |
| 1 एकड़ से कम | अनुपात से, न्यूनतम ₹4,000 | दो बराबर किस्तें |
| भागचाषी (बटाईदार) | न्यूनतम ₹4,000 | दो बराबर किस्तें |
ध्यान रहे — बहुत ज्यादा जमीन होने पर भी रकम ₹10,000 की छत पार नहीं करती। इसीलिए दो पड़ोसियों की रकम अलग-अलग होना बिल्कुल सामान्य है। ताजा दर्ज उदाहरण के तौर पर रबी की किस्त 8 जनवरी 2026 से खातों में जानी शुरू हुई थी — किस्त हमेशा मौसम शुरू होने के आसपास आती है, ताकि बीज-खाद के समय हाथ खाली न रहे।
दूसरा हिस्सा — ₹2 लाख का डेथ बेनिफिट
कृषक बंधु नाम एक है, पर काम दो अलग-अलग हैं। पहले वाला ऊपर लिखा सालाना पैसा है। दूसरा हिस्सा वह है जिसकी बात परिवार तब करता है जब घर पर सबसे भारी वक्त होता है।
मेरे गांव की तरफ एक परिवार में कमाने वाले किसान की अचानक मौत हो गई थी — खेती दो बीघे की, बचत कुछ खास नहीं। तब किसी ने बताया कि पंजीकृत किसान की 18 से 60 साल की उम्र के बीच मृत्यु होने पर परिवार को ₹2 लाख की एकमुश्त सहायता मिलती है। दावा ब्लॉक कृषि कार्यालय में हुआ, और उसी रकम से परिवार ने अगली किश्त तक का मौसम संभाला। यह बेनिफिट रकबे से नहीं जुड़ा — आधा बीघा हो या दस एकड़, रकम ₹2 लाख ही है। शर्त सिर्फ यह है कि किसान योजना में पंजीकृत हो और मृत्यु 18–60 की उम्र के भीतर हुई हो।
गांव की सूची में नाम — दो मिनट का टेस्ट
स्थिति की खोज बार-बार खाली आ रही हो तो गांव की लाभार्थी सूची देखिए। पोर्टल के रिपोर्ट/सूची वाले हिस्से में जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत चुनकर, फिर वित्तीय वर्ष और मौसम चुनकर सूची निकलती है। इस सूची से एक सीधा टेस्ट हो जाता है:
- सूची में नाम है, पैसा नहीं आया — दिक्कत भुगतान की तरफ है: बैंक खाता, एनपीसीआई मैपिंग या ट्रेजरी की कतार। खाता आधार से जुड़ा और चालू हालत में है या नहीं, शाखा में जांच कराइए। यही जांच पीएम किसान में भी काम आती है — पीएम किसान मास्टर गाइड में इसका पूरा तरीका है।
- सूची में नाम ही नहीं — दिक्कत पात्रता या जमीन के रिकॉर्ड की तरफ है। जमीन की खरीद, बंटवारे या विरासत के बाद नामांतरण (mutation) न हुआ हो तो नाम सूची से उतर जाता है। ब्लॉक भूमि कार्यालय से रिकॉर्ड दुरुस्त कराइए, अगले सत्यापन में नाम लौट आता है।
सूची में नाम देखने का यही ढांचा हमने लाभार्थी सूची वाली गाइड में स्क्रीनशॉट के साथ समझाया है — पोर्टल अलग है, तरीका मिलता-जुलता है।
पोर्टल की भाषा का मतलब
स्थिति में जो शब्द दिखते हैं, उनका मतलब जान लीजिए — आधे चक्कर यहीं बच जाते हैं। Under Process का मतलब सत्यापन चल रहा है, नया फॉर्म भरने से कुछ नहीं बनता। Approved यानी पात्रता मान ली गई, फाइल ट्रेजरी की कतार में है। Account Valid का मतलब पैसा आ गया — नहीं है। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि बैंक ने खाता सही माना है; रकम तब जाएगी जब स्थिति Amount Sent या Disbursed हो। और Rejected दिखे तो ब्लॉक कृषि कार्यालय से लिखित कारण पूछिए — अनुमान से भागदौड़ मत कीजिए।
एक आदत और — बैंक और वोटर/आधार रिकॉर्ड, दोनों जगह एक ही चालू मोबाइल नंबर रखिए, वरना किस्त का SMS किसी पुराने नंबर पर चला जाएगा और आपको खबर ही नही होगी। खाते में लंबे समय से कोई लेन-देन न हो तो मौसम से पहले एक छोटी सी जमा-निकासी एंट्री करा लीजिए, ताकि खाता निष्क्रिय न गिना जाए।
मिली-जुली हिंग्लिश में विस्तार से पढ़ना हो तो Krishak Bandhu Status Check की पूरी गाइड देखिए — उसमें पोर्टल के स्टेटस-दर-स्टेटस मतलब और भी खुलकर लिखे हैं।
किसान जो असल में पूछते हैं
वोटर कार्ड नंबर से स्थिति नहीं खुल रही — "no record found" आ रहा है। नाम कट गया क्या?
रुकिए, पहले टाइपिंग जांचिए। EPIC नंबर में तीन अंग्रेजी अक्षर और फिर सात अंक होते हैं — सबसे आम गलती अक्षर O की जगह शून्य (0) लिख देना है। कार्ड सामने रखकर हूबहू वैसा ही भरिए, बिना स्पेस के। इसके बाद भी रिकॉर्ड न मिले तो गांव की लाभार्थी सूची में नाम देखिए — सूची में नाम है तो रजिस्ट्रेशन सलामत है, दिक्कत सिर्फ खोज की है।
एक एकड़ से कम जमीन है — मुझे कितना मिलेगा?
हिसाब प्रो-राटा यानी अनुपात से बनता है, पर एक न्यूनतम सीमा तय है — साल में ₹4,000 से कम किसी पंजीकृत किसान को नहीं मिलता। एक एकड़ या उससे ज्यादा खेती-योग्य जमीन पर पूरा ₹10,000 सालाना बनता है, दो बराबर किस्तों में — खरीफ पर ₹5,000 और रबी पर ₹5,000।
डेथ बेनिफिट का दावा कौन और कैसे करता है?
पंजीकृत किसान की मृत्यु 18 से 60 साल की उम्र के बीच हुई हो, तो परिवार (नॉमिनी/कानूनी वारिस) को ₹2 लाख की एकमुश्त रकम मिलती है। दावा ब्लॉक कृषि कार्यालय (ADA office) में होता है — मृत्यु प्रमाणपत्र, किसान का कृषक बंधु रिकॉर्ड, वारिस का पहचान पत्र और बैंक पासबुक लेकर जाइए। खेती की जमीन का रकबा इस बेनिफिट में मायने नहीं रखता, सिर्फ उम्र की शर्त है।
पोर्टल पर "Account Valid" लिखा है — मतलब पैसा आ गया?
नहीं। यह सबसे बड़ी गलतफहमी है। Account Valid का मतलब सिर्फ इतना है कि बैंक ने आपका नाम और खाता नंबर सही मान लिया है — पैसा अभी नहीं भेजा गया। पैसा जाने पर स्थिति "Amount Sent" या "Disbursed" दिखती है। Account Valid दिखे तो बैंक के चक्कर मत काटिए, अगली रिलीज का इंतजार कीजिए।
बटाईदार (भागचाषी) हूं, जमीन मेरे नाम नहीं — रजिस्ट्रेशन हो सकता है?
हो सकता है। पश्चिम बंगाल की इस योजना में भागचाषी भी शामिल हैं — उन्हें न्यूनतम ₹4,000 सालाना दो किस्तों में मिलता है। रजिस्ट्रेशन के लिए ब्लॉक कृषि कार्यालय या दुआरे सरकार शिविर में खेती के कब्जे से जुड़े कागज के साथ आवेदन करना होता है। सत्यापन गांव के स्तर पर होता है, इसलिए स्थानीय रिकॉर्ड में खेती दर्ज होना जरूरी है।
किस्त कब-कब आती है?
साल में दो बार — खरीफ के मौसम से पहले (आम तौर पर जून के आसपास) और रबी से पहले। ताजा दर्ज उदाहरण: रबी की किस्त 8 जनवरी 2026 से खातों में जानी शुरू हुई थी। तारीखें हर साल घोषणा से तय होती हैं, इसलिए किसी निजी वेबसाइट की "पक्की तारीख" पर भरोसा मत कीजिए — पोर्टल और अखबार की सरकारी घोषणा ही आधार है।
