कृषक उन्नति योजना स्टेटस 2026 — अंतर राशि कब और कितनी मिलेगी?
Manish Kumar · अपडेटेड: 17/08/2026
छत्तीसगढ़ में धान बेचना आधा काम है। समिति में तौल हुई, टोकन कटा, MSP का पैसा आ गया — और फिर शुरू होता है असली इंतजार: अंतर की रकम कब आएगी, कितनी बनेगी, और न आए तो पूछें किससे। कृषक उन्नति योजना का पूरा खेल इसी ‘अंतर राशि’ का है, और यह लेख उसी का पूरा हिसाब है — मंडी की तौल से लेकर पासबुक के क्रेडिट तक।
अंतर राशि — सीधी भाषा में क्या है?
छत्तीसगढ़ सरकार का वादा है कि किसान को धान का दाम ₹3,100 प्रति क्विंटल तक मिलेगा — देश की सबसे ऊंची दर, जो 2026-27 के राज्य बजट में भी जारी रखी गई है (₹10,000 करोड़ के प्रावधान के साथ)। लेकिन समिति में खरीदी होती है केंद्र के तय MSP पर, जो खरीफ 2025-26 सीजन के लिए ₹2,369 प्रति क्विंटल (कॉमन धान) था। तो बचा हुआ फर्क कौन देगा?
वही फर्क — MSP और ₹3,100 के बीच का — राज्य सरकार अलग से किसान के खाते में भेजती है। इसी को अंतर राशि कहते हैं। मतलब हिसाब जमीन के रकबे पर नहीं, बल्कि समिति में बेची गई धान की मात्रा पर बनता है। जितना धान दर्ज, उतनी अंतर राशि — इसीलिए बाकी राज्यों की किसान-निधि योजनाओं से इसका पूरा ढांचा अलग है।
2 एकड़ वाले किसान का हिसाब — एक उदाहरण से
मान लीजिए रामलाल के पास 2 एकड़ खेत है। सरकारी खरीदी की सीमा 21 क्विंटल प्रति एकड़ है, यानी वह ज्यादा से ज्यादा 42 क्विंटल समिति में बेच सकता है। इस सीजन उसने 40 क्विंटल बेचा। अब गिनती कीजिए:
| मद | हिसाब | रकम |
| खरीदी के समय (MSP पर) | 40 क्विंटल × ₹2,369 | ₹94,760 |
| अंतर राशि (बाद में, DBT से) | 40 क्विंटल × ₹731 (₹3,100 − ₹2,369) | ₹29,240 |
| कुल (₹3,100 की दर से) | 40 क्विंटल × ₹3,100 | ₹1,24,000 |
यानी रामलाल के खाते में अंतर राशि के नाम पर ₹29,240 आने चाहिए — न कम, न ज्यादा। क्रेडिट इससे कम आए तो फर्क दो ही जगह हो सकता है: या खरीदी की एंट्री में मात्रा कम दर्ज है (समिति का मामला), या बैंक की तरफ कोई कटौती हुई है (पासबुक की debit एंट्रियां देखिए)। फर्क जहां का है, शिकायत वहीं ले जाइए — उल्टी जगह भागने में महीने निकल जाते हैं।
अब किस्तें नहीं — एकमुश्त भुगतान
पहले अंतर राशि कई किस्तों में आती थी और हर किस्त का अलग इंतजार चलता था। फरवरी 2026 में कैबिनेट ने यह पैटर्न ही बदल दिया — फैसला हुआ कि खरीफ 2025-26 की पूरी अंतर राशि होली से पहले एक ही बार में दी जाएगी। और हुआ भी वैसा ही: 28 फरवरी 2026 को राज्य सरकार ने करीब ₹10,324 करोड़ सीधे किसानों के खातों में भेजे। सरकारी आंकड़े के मुताबिक उस खरीफ सीजन में करीब 25.24 लाख किसानों से 141 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा धान खरीदा गया था।
मेरे एक परिचित धमतरी जिले के हैं — बताते थे कि पहले हर किस्त पर CSC जाकर स्टेटस दिखवाते थे, तीन बार का किराया अलग। अब एक ही तारीख का इंतजार रहता है। पुराने पैटर्न की आदत से “दूसरी किश्त कब आएगी” पूछने वाले अब भी बहुत हैं, इसलिए साफ लिख देते हैं: अब दूसरी किस्त होती ही नहीं।
स्टेटस चेक — कहां और कैसे देखें
इस योजना का स्टेटस देखने का तरीका PM Kisan जैसा एक-पोर्टल वाला नहीं है, क्योंकि पूरा सिस्टम धान खरीदी के रिकॉर्ड पर चलता है। जांच का सही क्रम यह है:
- समिति की एंट्री: अपनी सहकारी समिति से पूछिए कि आपके किसान कोड पर कितने क्विंटल की खरीदी दर्ज हुई। टोकन और तौल पर्ची संभालकर रखिए — विवाद में यही सबूत है।
- खाद्य विभाग का पोर्टल: खरीदी का रिकॉर्ड khadya.cg.nic.in पर चलता है — किसान पंजीयन और खरीदी की जानकारी वहीं से मिलती है।
- बैंक पासबुक: अंतर राशि DBT से आती है। release की तारीख के बाद 3-5 कामकाजी दिन में क्रेडिट न दिखे तो पहले बैंक से पूछिए कि कोई पेमेंट लौटा तो नहीं — खाता dormant होना और आधार लिंक न होना सबसे आम वजहें हैं।
समिति कहती है “रिकॉर्ड भेज दिया” और बैंक कहता है “कुछ नहीं आया” — दोनों सच हो सकते हैं, क्योंकि बीच में तीसरी कड़ी है: treasury से भुगतान फाइल का release। इतने दिन बाद भी कुछ न आए तो खाद्य विभाग कार्यालय में खरीदी ID के साथ लिखित शिकायत कीजिए। पैसा अटकने की बाकी वजहों के लिए पेमेंट फेल वाला गाइड भी काम आएगा — NPCI सीडिंग का सिस्टम हर DBT योजना में एक जैसा है।
नया कम्पोनेंट — धान छोड़ो तो ₹15,000 प्रति एकड़
खरीफ 2026 से योजना का दायरा धान से आगे बढ़ा है। कैबिनेट के मंजूर किए नए रूप में धान की जगह दूसरी फसल — दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो-कुटकी, रागी, कपास — लेने पर ₹15,000 प्रति एकड़ इनपुट सहायता मिलेगी। मकसद साफ है: हर खेत में सिर्फ धान न हो।
ध्यान देने की बात यह है कि अंतर राशि और यह ₹15,000 वाला कम्पोनेंट दो अलग चीजें हैं। अंतर राशि बेचे गए धान पर बनती है; नई सहायता का हिसाब AgriStack पंजीयन और डिजिटल फसल सर्वे से चलेगा। इसलिए जो किसान फसल बदलने की सोच रहे हैं, उनका पहला काम farmer registration और फसल की डिजिटल एंट्री दुरुस्त करवाना है — सर्वे में फसल दर्ज नहीं हुई तो claim बनता ही नहीं। किस्त के बड़े सिस्टम की समझ के लिए PM Kisan किस्त गाइड देख लीजिए।
अगले सीजन के लिए तीन काम — अभी से
1. किसान पंजीयन की जांच बुवाई से पहले। नया खाता खरीदा हो, बंटवारा हुआ हो, या पिछले साल कोई एंट्री गलत रही हो — सुधार का सही वक्त सीजन शुरू होने से पहले का है। बाद में लंबी लाइन और अटकी फाइल।
2. बैंक खाता जिंदा रखिए। साल में एक बार भी लेन-देन न हो तो खाता dormant हो जाता है और DBT लौट जाता है। जिस खाते में अंतर राशि आनी है, उसमें छोटा-मोटा लेन-देन चालू रखिए और आधार लिंकिंग बैंक से confirm करवा लीजिए।
3. हर कागज की फोटो। टोकन, तौल पर्ची, समिति की एंट्री — सबकी फोटो फोन में रखिए। मैंने खुद देखा है कि शिकायत के वक्त सबसे पहले यही मांगे जाते हैं, और जिनके पास होते हैं उनका काम हफ्तों पहले निपट जाता है।
किसान अक्सर यही पूछते हैं
सोसाइटी में धान बेचा था, टोकन भी कटा — फिर भी अंतर राशि नहीं आई। कहां अटकी?+
इस बार पूरा पैसा एक साथ क्यों आया? पहले तो किस्तों में आता था।+
मैंने 21 क्विंटल प्रति एकड़ से ज्यादा धान बेचा — बाकी का अंतर मिलेगा?+
बटाई (अधिया) पर खेती करता हूं — अंतर राशि किसे मिलेगी?+
धान छोड़कर दूसरी फसल लगाऊं तो ₹15,000 प्रति एकड़ वाला फायदा कैसे मिलेगा?+
खाते में हिसाब से कम रकम आई — कहां शिकायत करूं?+
और विस्तार चाहिए तो Krishak Unnati Yojana का Hinglish गाइड पढ़िए — वहां सीजन की पूरी timeline भी है। PM Kisan की हर उलझन के लिए मास्टर गाइड हमेशा की तरह मौजूद है।
Disclaimer:दरें और नियम सरकारी घोषणाओं से बदल सकते हैं। अंतिम जानकारी के लिए खाद्य विभाग (khadya.cg.nic.in) या अपनी समिति से पुष्टि करें।
