बिहार किसान पंजीकरण स्टेटस 2026 — 13 अंकों का नंबर, सारी योजनाओं का दरवाजा
Manish Kumar · अपडेटेड: 16/08/2026
बिहार में खेती से जुड़ी कोई भी सरकारी मदद चाहिए — डीजल अनुदान, बाढ़ का मुआवजा, सस्ता बीज — तो हर रास्ता एक ही दरवाजे से होकर जाता है: 13 अंकों की किसान पंजीकरण संख्या, जो DBT पोर्टल (dbtagriculture.bihar.gov.in) पर बनती है। यह नंबर नहीं तो अर्जी आगे बढ़ती ही नहीं। बात इतनी सी है, पर इसी नंबर के चक्कर में हर सीजन हजारो किसान अटकते हैं।
मेरे ससुराल की तरफ के एक किसान ने पिछली बाढ़ के बाद बताया — पानी उतरा तो पता चला कि इनपुट अनुदान की खिड़की सिर्फ दो हफ्ते की है, और उनका रजिस्ट्रेशन नंबर उस CSC वाले के पास था जो अब दुकान बंद कर चुका था। खिड़की निकल गई। इसलिए यह लेख सिर्फ स्टेटस चेक का तरीका नहीं बताता — नंबर भूल जाने से लेकर पैसा बैंक से लौट आने तक, हर मोड़ का रास्ता लिखा है।
पहले यह समझिए — DBT पोर्टल एक छाता है, योजना नहीं
DBT मतलब Direct Benefit Transfer — पैसा सीधा खाते में। पर बिहार का यह पोर्टल अपने आप में कोई योजना नहीं है; यह एक छाता है जिसके नीचे कई अलग-अलग मदद चलती हैं। पंजीकरण एक बार होता है, और फिर उसी एक नंबर से हर योजना में अलग-अलग आवेदन डाला जाता है। यानी पंजीकरण चाबी है, हर योजना का ताला अलग।
इसी से जुड़ी दूसरी जरूरी बात — पोर्टल पर पंजीकरण विवरण और आवेदन की स्थिति दो अलग चीजें हैं। पंजीकरण विवरण बताता है कि आपकी एंट्री बनी है या नहीं और कौन सा बैंक खाता जुड़ा है; आवेदन की स्थिति बताती है कि डीजल या इनपुट अनुदान की आपकी अर्जी कहां पहुंची। पंजीकरण संख्या एक ही रहती है, पर हर अर्जी की अपनी अलग आवेदन ID बनती है — रसीद पर लिखी वही ID संभालकर रखिए, स्थिति उसी से निकलती है।
नंबर भूल गए? नई एंट्री मत बनाइए — तीन रास्ते हैं
सबसे पहले वह गलती, जो सबसे महंगी पड़ती है: नंबर नहीं मिल रहा तो लोग नया रजिस्ट्रेशन करा लेते हैं। डुप्लीकेट एंट्री पकड़ में आते ही दोनों रिकॉर्ड ब्लॉक हो जाते हैं, और फिर प्रखंड कार्यालय के चक्कर। नंबर निकालने के सीधे रास्ते ये हैं:
- आधार से: पोर्टल के पंजीकरण विवरण/खोज वाले हिस्से में आधार नंबर डालिए — नाम, बैंक और 13 अंकों की संख्या समेत पूरा ब्योरा दिख जाता है।
- पुराने SMS से: पंजीकरण के वक्त जो SMS आया था, उसमें नंबर लिखा होता है। फोन का मेसेज बॉक्स एक बार खंगाल लीजिए।
- किसान सलाहकार से: पंचायत के किसान सलाहकार के पास गांव भर की एंट्री का रिकॉर्ड रहता है — आधार लेकर जाइए, नंबर निकलवा लीजिए।
एक नंबर, कई दरवाजे — किस योजना में क्या मिलता है
अब असली काम की बात। नीचे हर बड़ी मदद का छोटा खाका है — क्या मिलता है, कब आवेदन होता है, और स्थिति कहां दिखेगी। रकम और तारीखें हर सीजन की अधिसूचना से बदलती हैं, इसलिए अंतिम भरोसा हमेशा पोर्टल की ताजा सूचना पर कीजिए।
डीजल अनुदान — सिंचाई का पैसा वापस
सूखे जैसे हालात में डीजल पंप से सिंचाई करने वालों को अनुदान मिलता है। खरीफ 2025 की अधिसूचना के मुताबिक दर थी ₹75 प्रति लीटर — यानी ₹750 प्रति एकड़ प्रति सिंचाई। धान का बिचड़ा और जूट पर अधिकतम 2 सिंचाई (₹1,500 प्रति एकड़), खड़ी फसलों — धान, मक्का, दलहन, तिलहन, सब्जी — पर 3 सिंचाई तक (₹2,250 प्रति एकड़), और एक किसान को ज्यादा से ज्यादा 8 एकड़ तक लाभ। शर्त एक ही है जो लोग अक्सर चूक जाते हैं: अधिकृत पेट्रोल पंप की पक्की डिजिटल रसीद, जिस पर पंजीकरण संख्या के आखिरी 10 अंक दर्ज हों। रसीद नहीं तो दावा नहीं।
स्थिति: पोर्टल → आवेदन की स्थिति → डीजल वाली आवेदन ID से।
कृषि इनपुट अनुदान — बाढ़/अतिवृष्टि का मुआवजा
फसल 33% से ज्यादा बर्बाद हो तो सरकार प्रभावित पंचायतों को अधिसूचित कर यह मदद खोलती है — खरीफ 2025 के दौर में असिंचित जमीन पर ₹8,500 और सिंचित पर ₹17,000 प्रति हेक्टेयर, अधिकतम 2 हेक्टेयर तक की दर अधिसूचित थी। पर ध्यान रखिए — लाभ सिर्फ अधिसूचित पंचायतों के किसानों को मिलता है। पहले सूची में अपनी पंचायत देखिए, तब आवेदन कीजिए। खिड़की छोटी होती है, अक्सर दो हफ्ते के आसपास — इसीलिए नंबर पहले से तैयार रखना ही समझदारी है।
स्थिति: आवेदन की स्थिति में, इनपुट अनुदान वाली आवेदन ID से।
बीज अनुदान (BRBN) — सस्ता बीज, घर तक भी
बिहार राज्य बीज निगम हर सीजन अनुदानित दर पर बीज देता है — आवेदन उसी 13 अंकों की संख्या से, सीजन शुरू होने से पहले। होम डिलीवरी का विकल्प भी रहता है। कौन सा बीज किस दर पर, यह हर सीजन की सूचना में आता है।
पीएम किसान — जुड़ा है, पर अलग है
बिहार में पीएम किसान की नई अर्जी का रास्ता DBT पंजीकरण से होकर जाता है, पर किस्त का पैसा केंद्र के सिस्टम से आता है और स्थिति pmkisan.gov.in के Know Your Status में दिखती है — DBT बिहार पोर्टल पर नहीं। ₹6,000 सालाना वाली इस योजना का पूरा हिसाब पीएम किसान मास्टर गाइड में अलग से लिखा है।
नई एंट्री बनानी है? इन दो पत्थरों से मत टकराइए
रजिस्ट्रेशन का रास्ता सीधा है — पोर्टल खोलिए, पंजीकरण वाले हिस्से में जाइए, आधार से पहचान कीजिए, अपनी और बैंक की जानकारी भरिए, सबमिट करते ही SMS पर नंबर। पूरा काम मुश्किल से दस मिनट का है। पर दो जगह लोग बार-बार फंसते हैं:
पहला पत्थर — आधार का नाम। सिस्टम UIDAI से नाम अक्षर-अक्षर मिलाता है। आधार में जैसा छपा है, ठीक वैसा ही लिखिए — बीच का डॉट, Kumar, Devi, सब समेत। मैंने खुद एक रिश्तेदार की एंट्री करते वक्त देखा — तीन बार authentication फेल हुआ, और गलती बस इतनी थी कि आधार में नाम के आगे ‘Kumar’ था जो हम छोड़ रहे थे।
दूसरा पत्थर — पंजीकरण का प्रकार। रैयत (जमीन अपने नाम), गैर-रैयत (बटाई पर खेती), या दोनों। बटाईदार गैर-रैयत में स्व-घोषणा के साथ आवेदन करता है। गलत प्रकार चुना तो सत्यापन में फाइल वहीं रुक जाती है, और बाद में प्रकार बदलवाना लंबा चक्कर है। दो मिनट सोचकर सही विकल्प चुन लेना आधी परेशानी बचा लेता है।
अर्जी अटक जाए तो सीढ़ी नीचे से चढ़िए
हर आवेदन तीन कड़ियों से गुजरता है — पंचायत का किसान सलाहकार, फिर कृषि समन्वयक, और आखिर में प्रखंड कृषि पदाधिकारी (BAO), जहां अंतिम मंजूरी होती है। अर्जी डाले 7-10 दिन हो जाएं और कुछ न हिले, तो पहले किसान सलाहकार से पूछिए — ज्यादातर मामले वहीं सुलझ जाते हैं। दो हफ्ते से जादा अटके तो BAO कार्यालय में लिखित प्रार्थना दीजिए और receiving कॉपी जरूर लीजिए — जुबानी शिकायत हवा में उड़ जाती है, लिखित की कॉपी आगे सबूत बनती है। उसके ऊपर जिला कृषि पदाधिकारी हैं।
पैसा बैंक से लौट गया? इलाज है, पर खुद-ब-खुद नहीं होता
स्क्रीन पर payment failed या rejected दिखे तो मतलब पैसा चला था, पर खाते ने लौटा दिया — खाता बंद या dormant, KYC अधूरी, नाम mismatch, या आधार सीडिंग नहीं। पहले बैंक जाकर वजह ठीक कराइए और सबूत लीजिए (पासबुक एंट्री, सीडिंग स्लिप), फिर किसान सलाहकार या BAO कार्यालय के जरिए दोबारा भुगतान (re-process) की request दीजिए — अगले चक्र में नाम फिर चढ़ता है। request दिए बिना कुछ नहीं होता। बैंक rejection के हर कोड का मतलब और इलाज भुगतान फेल होने की गाइड में विस्तार से है — वही तरीका यहां भी लगता है।
और अगर आप यह पूरी गाइड रोमन हिंदी में, हर योजना की और बारीक डिटेल के साथ पढ़ना चाहें, तो हिंग्लिश वाला विस्तृत लेख भी मौजूद है।
किसानों के असली सवाल, सीधे जवाब
CSC वाले ने रजिस्ट्रेशन किया था, मुझे नंबर ही नहीं दिया — अब कहां से लाऊं?
घबराइए मत, नंबर सिस्टम में सुरक्षित है। dbtagriculture.bihar.gov.in पर पंजीकरण विवरण वाले हिस्से में अपना आधार नंबर डालिए — पूरी जानकारी निकल आएगी, 13 अंकों की संख्या समेत। दूसरा रास्ता: पंचायत के किसान सलाहकार के पास गांव की सारी एंट्री का रिकॉर्ड रहता है, आधार लेकर जाइए। नई एंट्री बिल्कुल मत बनवाइए — डुप्लीकेट पकड़ में आते ही दोनों रिकॉर्ड अटक जाते हैं।
डीजल अनुदान का आवेदन डाले महीना हो गया, पैसा नहीं आया — किससे पूछूं?
सबसे पहले पोर्टल के आवेदन स्थिति वाले हिस्से में अपनी डीजल वाली आवेदन ID डालकर देखिए — आवेदन किस स्तर पर पड़ा है, वहीं दिखेगा। सत्यापन में अटका हो तो पहली सीढ़ी किसान सलाहकार, फिर कृषि समन्वयक, और दो हफ्ते से ज्यादा हो जाए तो प्रखंड कृषि पदाधिकारी (BAO) के दफ्तर में लिखित आवेदन दीजिए और receiving कॉपी जरूर लीजिए।
मैं बटाईदार हूं, जमीन मेरे नाम नहीं है — क्या मेरा पंजीकरण हो सकता है?
हां, हो सकता है। पंजीकरण के तीन प्रकार हैं — रैयत, गैर-रैयत और दोनों। बटाईदार गैर-रैयत श्रेणी में स्व-घोषणा (self-declaration) के साथ आवेदन करता है। कुछ जमीन अपनी और कुछ बटाई पर हो तो "दोनों" चुनिए, वरना अनुदान का हिसाब आधा ही बनेगा।
आधार वाला पुराना मोबाइल नंबर बंद हो गया है, OTP नहीं आ रहा — क्या करूं?
यह दिक्कत पोर्टल से नहीं सुलझेगी, क्योंकि OTP उसी नंबर पर जाता है जो आधार से जुड़ा है। पहले नजदीकी आधार केंद्र जाकर मोबाइल नंबर अपडेट कराइए (यह काम ऑनलाइन नहीं होता, केंद्र जाना ही पड़ता है), फिर पोर्टल पर आगे बढ़िए। नंबर अपडेट होने में आमतौर पर कुछ दिन लगते हैं।
स्क्रीन पर "Aadhaar authentication failed" आ रहा है — नाम तो सही लिख रहा हूं।
सिस्टम नाम अक्षर-अक्षर मिलाता है, "सही" से काम नहीं चलता — आधार में जैसा छपा है ठीक वैसा ही चाहिए। आधार में "Md. Salim" है और आप "Mohammad Salim" लिख रहे हैं तो फेल होगा। आधार कार्ड सामने रखकर हूबहू वही स्पेलिंग उतारिए, बीच के डॉट और Kumar/Devi जैसे शब्द समेत।
पीएम किसान की किस्त का स्टेटस भी क्या इसी DBT पोर्टल पर दिखेगा?
नहीं — यही सबसे आम भूल है। बिहार में पीएम किसान की नई अर्जी का रास्ता DBT पंजीकरण से होकर जरूर जाता है, पर किस्त का पैसा और उसकी स्थिति केंद्र के पोर्टल pmkisan.gov.in के Know Your Status में दिखती है। दोनों पोर्टल अलग हैं, दोनों की स्थिति अलग जगह देखनी होती है।
कृषि इनपुट अनुदान सबको मिलता है या सिर्फ कुछ पंचायतों को?
सिर्फ अधिसूचित पंचायतों को। बाढ़ या अतिवृष्टि के बाद सरकार प्रभावित पंचायतों की सूची जारी करती है — आपकी पंचायत उस सूची में है तभी आवेदन बनेगा। इसलिए आवेदन से पहले सूची में अपनी पंचायत का नाम देखिए; नाम नहीं है तो आवेदन डालने का कोई फायदा नहीं।
