राजस्थान किसान सम्मान निधि — ₹9,000 का हिसाब और किस्त की स्थिति
Manish Kumar · अपडेटेड: 16/08/2026
जोधपुर के एक किसान ने पिछले महीने मुझे लिखा — “भाईसाहब, पड़ोसी के खाते में ₹1,000 आ गए, मेरे में नहीं। मेरा नाम कट गया क्या?” उसका नाम कटा नहीं था। उसकी जन आधार में मोबाइल नंबर पुराना पड़ा था, और यही एक चीज उसकी किस्त और उसके बीच खड़ी थी।
राजस्थान में यही असली कहानी है। पैसा कितना मिलता है, यह सवाल तो आसान है — मुश्किल यह है कि पैसा किस जगह अटकता है और किस दरवाजे पर जाकर खुलता है। नीचे दोनों बातें क्रम से रखी हैं: पहले हिसाब, फिर अड़चनें।
हिसाब साफ करें — ₹6,000 केंद्र का, ₹3,000 राज्य का
केंद्र की पीएम किसान सम्मान निधि से हर पात्र किसान परिवार को ₹6,000 सालाना मिलते हैं, ₹2,000 की तीन किस्तों में — यह पूरे देश का ढांचा है और pmkisan.gov.in पर यही लिखा है। राजस्थान सरकार इसके ऊपर अपनी ओर से पैसा जोड़ती है, जिसका नाम है मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि।
राज्य वाली योजना 30 जून 2024 को लागू हुई थी। तब राज्य का हिस्सा ₹2,000 सालाना था — मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की घोषणा के मुताबिक कुल रकम ₹6,000 से ₹8,000 हुई थी, और पहली किस्त में करीब 65 लाख किसानों के खातों में ₹650 करोड़ से ज्यादा भेजे गए थे। इसके बाद राज्य का हिस्सा ₹3,000 कर दिया गया, जिससे कुल आंकड़ा ₹9,000 पर पहुंचा। मुख्यमंत्री कार्यालय की जून 2026 की घोषणा में भी यही बात दोहराई गई — “राज्य सरकार ने किसान सम्मान निधि की राशि 6 हजार रुपये से बढ़ाकर 9 हजार रुपये कर दी है।”
| पैसा किसका | सालाना राशि | किस्तों का ढांचा | तारीख कौन तय करता है |
|---|---|---|---|
| केंद्र — पीएम किसान | ₹6,000 | ₹2,000 × 3 | केंद्र सरकार का कार्यक्रम |
| राजस्थान — मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि | ₹3,000 | किस्तों में, राज्य के आदेश के अनुसार | राज्य सरकार का आदेश |
| कुल | ₹9,000 | दो अलग-अलग भुगतान | दोनों अलग |
तालिका की आखिरी लाइन ही असली काम की है — दो अलग-अलग भुगतान। बहुत से किसान मानते हैं कि ₹9,000 एक ही बार में या पीएम किसान की किस्त के साथ ही आएंगे। ऐसा नहीं होता। बैंक स्टेटमेंट में केंद्र की एंट्री अलग दिखेगी, राज्य की अलग, और बीच में कई हफ्ते का अंतर हो सकता है।
राज्य की किस्तें अब तक कैसे आईं
सरकारी घोषणाओं का रिकॉर्ड देखें तो राज्य वाली किस्त का एक साफ पैटर्न बनता है — पहले वित्तीय मंजूरी और आदेश, फिर किसी जिले से मुख्यमंत्री का कार्यक्रम, और उसी दिन या अगले दिन खातों में सीधा हस्तांतरण।
सबसे ज्यादा दर्ज हुई किस्त चौथी वाली है। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक 18 अक्टूबर 2025 को भरतपुर जिले के नदबई से मुख्यमंत्री ने चौथी किस्त जारी की — करीब ₹717.96 करोड़, लगभग 72 लाख किसानों के खातों में। उसी मौके पर बताया गया कि योजना शुरू होने से अब तक 70 लाख से ज्यादा किसानों को कुल ₹1,355 करोड़ से अधिक भेजे जा चुके हैं।
इन आंकड़ों से एक और बात निकलती है जो कोई नहीं बताता — किस्त की कोई तय तारीख (जैसे हर महीने की 10 तारीख) इस योजना में नहीं है। इसलिए किसी वेबसाइट पर “अगली किस्त इस दिन आएगी” लिखा दिखे और साथ में कोई सरकारी आदेश का हवाला न हो, तो वह अंदाजा है, खबर नहीं।
स्थिति कैसे देखें — जन आधार वाला तरीका
राजस्थान में हर कल्याणकारी योजना का रास्ता जन आधार से होकर जाता है, और यह योजना भी उसी से जुड़ी है। स्थिति देखने में दो मिनट लगते हैं और एक भी रुपया खर्च नहीं होता।
जन सूचना पोर्टल से
- jansoochna.rajasthan.gov.in खोलिए — यही राज्य का आधिकारिक पोर्टल है।
- “योजनाओं की जानकारी” वाले हिस्से में जाकर मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि से जुड़ी योजना चुनिए।
- अपना जन आधार नंबर या आधार नंबर भरिए।
- खोजें दबाइए — भुगतान की स्थिति सफल, लंबित या अस्वीकृत के रूप में सामने आ जाएगी।
- जो स्क्रीन दिखे उसका स्क्रीनशॉट रख लीजिए। बाद में शिकायत करते समय यही आपका कागज है।
सहकारिता पोर्टल से
दूसरा रास्ता rajsahakar.rajasthan.gov.in है — वहां “Know Your Status” में जाकर मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि से जुड़ा विकल्प चुनिए और विवरण भरिए। नतीजा वही आता है; एक पोर्टल धीमा चले तो दूसरा काम आ जाता है।
केंद्र वाली किस्त का हिसाब इन पोर्टल पर नहीं मिलेगा। उसके लिए pmkisan.gov.in का Know Your Status अलग से देखना पड़ता है — मोबाइल नंबर से देखने का पूरा तरीका इस गाइड में क्रम से लिखा है।
चार वजहें जिनसे राजस्थान के किसानों का पैसा अटकता है
मैंने खुद पोर्टल खोलकर और शिकायतें पढ़कर देखा तो घूम-फिर कर मामला इन्हीं चार में निकलता है। क्रम भी लगभग यही रहता है — पहली वजह सबसे आम।
1. ई-केवाईसी अधूरी
राज्य अपनी अलग जांच नहीं करता, केंद्र के सत्यापित रिकॉर्ड को ही उठाता है। इसका सीधा मतलब — पीएम किसान में ई-केवाईसी लंबित है तो राज्य की किश्त भी लंबित रहेगी। ई-केवाईसी ओटीपी से घर बैठे हो जाती है, बुजुर्गों के लिए फेस ऑथेंटिकेशन वाला रास्ता भी है; दोनों तरीके यहां समझाए हुए हैं।
2. जन आधार में गड़बड़ी
यह राजस्थान की अपनी अड़चन है, और सबसे ज्यादा नजरअंदाज होती है। जन आधार में नाम की स्पेलिंग, मोबाइल नंबर या परिवार का ढांचा गलत हो तो भुगतान की लाइन बनती ही नहीं। सुधार ई-मित्र पर होता है — जन आधार कार्ड, आधार और जमीन के कागज साथ ले जाइए।
3. बैंक खाता आधार से जुड़ा न होना
डीबीटी का पैसा उस खाते में जाता है जो एनपीसीआई मैपर में आधार से जुड़ा है। खाता बदल लिया, नंबर बदल गया, या खाता निष्क्रिय पड़ा है — तीनों हालत में पैसा लौट जाता है। शाखा में एनपीसीआई सीडिंग फॉर्म भरना पड़ता है, और यह प्रक्रिया एक ही चक्कर में निपट जाती है अगर पासबुक और आधार साथ हों।
4. जमीन के रिकॉर्ड की अड़चन
विरासत के बाद नाम न चढ़ा हो, रकबे में फर्क हो, या नामांतरण लंबित हो — तो सत्यापन वहीं रुक जाता है। अच्छी बात यह है कि राजस्थान में जमाबंदी खुद पढ़ी जा सकती है: apnakhata.rajasthan.gov.in पर जिला, तहसील और गांव चुनकर खाता या खसरा नंबर से नकल निकल आती है। पटवारी के पास जाने से पहले यह देख लेना समय बचाता है — आप बता पाते हैं कि ठीक क्या कराना है।
पैसा नहीं आया — किस क्रम से आगे बढ़ें
घबराने की जगह क्रम से चलिए। ज्यादातर मामले पहले दो कदमों में ही सुलझ जाते हैं।
- बैंक स्टेटमेंट खुद देखिए। एनईएफटी या डीबीटी नाम की एंट्री खोजिए। मिल गई तो मामला खत्म — एसएमएस न आना आम बात है।
- जन सूचना पोर्टल पर स्थिति देखिए। लंबित दिखे तो कारण भी वहीं संकेत में मिल जाता है।
- हेल्पलाइन पर बात कीजिए। जन सूचना पोर्टल के मुखपृष्ठ पर दर्ज हेल्पलाइन नंबर 1800-180-6127 पर शिकायत दर्ज कराइए और शिकायत संख्या जरूर लिख लीजिए।
- जमीनी स्तर पर जाइए। कृषि पर्यवेक्षक, पटवारी या तहसील कार्यालय — रिकॉर्ड की गड़बड़ी सिर्फ यहीं ठीक होती है, किसी पोर्टल पर नहीं।
एक बात अनुभव की — बिना रसीद वाली मौखिक शिकायत का कोई रिकॉर्ड नहीं बनता। जो भी दफ्तर जाएं, आवेदन की एक प्रति पर पावती जरूर लें। अगली बार बात शुरू से नहीं, वहीं से आगे बढ़ती है।
पात्रता — शर्तें गिनी-चुनी हैं
- राजस्थान का मूल निवासी हो और उसके नाम खेती की जमीन का रिकॉर्ड हो।
- पीएम किसान का सक्रिय, सत्यापित लाभार्थी हो — यही असली शर्त है।
- ई-केवाईसी पूरी हो और बैंक खाता आधार से जुड़ा तथा डीबीटी सक्षम हो।
- जन आधार में परिवार की जानकारी सही दर्ज हो।
- पीएम किसान के बाहर रखे जाने वाले नियम यहां भी लागू हैं — आयकर देने वाले परिवार, सरकारी कर्मचारी, ₹10,000 से अधिक पेंशन पाने वाले सेवानिवृत्त अधिकारी, और पंजीकृत डॉक्टर, वकील, इंजीनियर या सीए जैसे पेशेवर।
एक ही परिवार में पति और पत्नी दोनों को यह पैसा नहीं मिलता — परिवार को एक इकाई माना जाता है। दोनों ने आवेदन कर दिया हो तो आगे वसूली का नोटिस आने का जोखिम रहता है; इस नियम का पूरा ब्यौरा इस लेख में है।
नया किसान हैं तो रास्ता क्या है
राज्य की योजना में सीधा आवेदन नहीं होता, इसलिए शुरुआत पीएम किसान से ही करनी पड़ती है। क्रम यह है: पहले पीएम किसान में पंजीकरण (ऑनलाइन या नजदीकी केंद्र से), फिर ई-केवाईसी, फिर पटवारी से जमीन के रिकॉर्ड का सत्यापन। मंजूरी मिलते ही राज्य की सूची में नाम अपने आप जुड़ जाता है।
इसमें समय लगता है — जिले के हिसाब से कुछ हफ्तों से लेकर दो-तीन महीने तक। यह देरी सामान्य है, इसे नाम कटना न समझें। पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया नई रजिस्ट्रेशन गाइड में क्रम से दी हुई है।
कुछ सवाल जो सबसे ज्यादा पूछे जाते हैं
आखिर में — एक छोटी सलाह
₹9,000 सालाना कोई बड़ी रकम नहीं लगती, लेकिन बीज-खाद-डीजल के खर्च में हर किस्त काम आती है। इसका पूरा फायदा उन्हीं को मिलता है जो साल में एक बार बैठकर चार चीजें जांच लेते हैं: ई-केवाईसी की स्थिति, जन आधार का मोबाइल नंबर, बैंक खाते की आधार सीडिंग, और जमाबंदी में अपना नाम। ये चारों सही हों तो किस्त अपने आप आती रहती है — और अटके तो आपको पता होता है कि किस दरवाजे पर जाना है।
यह लेख किन चीजों पर टिका है — राज्य के हिस्से की राशि और कुल ₹9,000 का आंकड़ा मुख्यमंत्री कार्यालय, राजस्थान की घोषणा से; ₹8,000 से शुरुआत, 30 जून 2024 को लागू होना और पहली किस्त में करीब 65 लाख किसानों को ₹650 करोड़ से अधिक का हस्तांतरण उस समय की समाचार एजेंसी रिपोर्ट से; चौथी किस्त के ₹717.96 करोड़, लगभग 72 लाख किसान और अब तक कुल ₹1,355 करोड़ से अधिक के आंकड़े पीटीआई की 18 अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट से; स्थिति देखने की प्रक्रिया, हेल्पलाइन 1800-180-6127 और जमाबंदी का तरीका राज्य के पोर्टल jansoochna.rajasthan.gov.in, rajsahakar.rajasthan.gov.in और apnakhata.rajasthan.gov.in से। किस्त की तारीखें सरकारी आदेश से तय होती हैं, इसलिए कोई अनुमानित तारीख यहां नहीं लिखी गई है। (जानकारी 16/08/2026 तक जांची हुई है।)
