किसान कर्ज माफी 2026 — किस राज्य में सच में चल रही है
Manish Kumar · अपडेटेड: 18/08/2026
इस पेज का update log
18 अगस्त 2026 — महाराष्ट्र की नई पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर कर्जमाफी योजना के पहले चरण की जानकारी जोड़ी। तेलंगाना वाले हिस्से में साफ किया कि वह योजना 2024 में पूरी हो चुकी है।
अगली update — हर 2 महीने। जिस राज्य का official notification आएगा, वही टेबल में जुड़ेगा। सिर्फ घोषणा पर कुछ नहीं लिखा जाता।
पहले वह बात, जो आपको कहीं और मुश्किल से मिलेगी। “किसान कर्ज माफी योजना” नाम की कोई एक राष्ट्रीय योजना नहीं है। न कोई केंद्रीय पोर्टल है जहां सब राज्यों के किसान अपना नाम ढूंढ सकें, न कोई फॉर्म जो भरने से कर्ज माफ हो जाए। खेती का कर्ज माफ करना राज्य का फैसला है — अपने बजट से, अपने नियमों से, अपनी टाइमिंग से।
इसलिए सही सवाल यह नहीं है कि “कर्ज माफी 2026 की लिस्ट कब आएगी”। सही सवाल है: मेरे राज्य में अभी कोई योजना चल रही है या नहीं? नीचे की टेबल इसी का जवाब है, और उसमें सिर्फ वे राज्य हैं जिनके लिए official notification, GR या पोर्टल मिल गया। जहां सिर्फ बयान है, वहां साफ लिखा है कि बयान है।
राज्यवार स्थिति — क्या चालू, क्या बंद, क्या सिर्फ बयान
| राज्य | योजना | स्थिति | पोर्टल |
|---|---|---|---|
| महाराष्ट्र | पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर शेतकरी कर्जमाफी योजना — ₹2 लाख तक | चल रही — चरणबद्ध | mjpsky.maharashtra.gov.in |
| तेलंगाना | रायतु रुणा माफी — ₹2 लाख तक | पूरी हो चुकी (2024) | clw.telangana.gov.in |
| उत्तर प्रदेश | किसान ऋण मोचन योजना (2017) — ₹1 लाख तक | पुरानी योजना, छूटे केस | upkisankarjrahat.upsdc.gov.in |
| तमिलनाडु | सहकारी फसल ऋण माफी — ₹75,000 तक | घोषणा — नियम आने हैं | राज्य सहकारिता विभाग |
| बाकी राज्य | — | कोई official notification नहीं मिला | — |
छत्तीसगढ़ का नाम इस टेबल में जान-बूझकर नहीं है। वहां कृषक उन्नति योजना में खरीफ 2026 से दलहन, तिलहन, मक्का, मिलेट्स और कपास पर ₹15,000 प्रति एकड़ input सहायता दी जा रही है — यह मदद है, कर्ज माफी नहीं। दोनों अलग चीजें हैं।
महाराष्ट्र — फिलहाल सबसे बड़ी योजना, और उसका एक अजीब सा फायदा
2026 में असली काम महाराष्ट्र में हुआ। बजट 2026-27 में पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर शेतकरी कर्जमाफी योजना की घोषणा हुई और जून 2026 में इसे मंजूरी मिली — लगभग ₹36,585 करोड़ का आकार। इसमें दो हिस्से हैं: ₹2 लाख तक का बकाया फसल ऋण माफ, और जिन्होंने समय पर कर्ज चुकाया उनके लिए ₹50,000 का प्रोत्साहन। बकाया की cut-off तारीख 30 सितंबर 2025 रखी गई है।
अब वह बात जो सबसे ज्यादा गलत लिखी जाती है। महाराष्ट्र के कर्जमाफी पोर्टल पर साफ लिखा है — “अर्ज करण्याची आवश्यकता नाही”, यानी कोई फॉर्म भरने की जरूरत नहीं है। बैंक के रिकॉर्ड और सरकारी डेटा से लिस्ट बनती है। इसका मतलब दो बातें: पहला, जो साइट आपसे “कर्जमाफी application” भरवा रही है वह फ्रॉड है। दूसरा, आपका काम फॉर्म ढूंढना नहीं — आपका काम यह देखना है कि बैंक ने आपका रिकॉर्ड ठीक भेजा है या नहीं। नाम की स्पेलिंग, आधार, खाता नंबर, और एक ही परिवार के दो खाते — गलती इन चार में से किसी एक में होती है।
पहले चरण में लगभग 31 लाख किसान लिए गए हैं, और पहले उन्हें लिया गया जिनका बकाया ₹2 लाख तक है। जिनका कर्ज इससे ज्यादा है, उनके लिए One Time Settlement का रास्ता रखा गया है — यानी ज्यादा कर्ज वाले किसान को पूरा माफ होने का इंतजार नहीं करना चाहिए, OTS की बात बैंक से शुरू कर देनी चाहिए।
तेलंगाना — यह योजना हो चुकी है, चल नहीं रही
तेलंगाना की रायतु रुणा माफी आज भी सबसे ज्यादा सर्च होने वाली कर्ज माफी है, जबकि वह 2024 में पूरी हो चुकी। तीन चरण थे — 18 जुलाई, 30 जुलाई और 15 अगस्त 2024। कुल ₹17,934 करोड़ से लगभग 22.37 लाख किसानों के फसल ऋण माफ हुए: पहले चरण में ₹1 लाख तक वाले 11,50,193 किसान, दूसरे में ₹1–1.5 लाख वाले 6,40,823, और तीसरे में ₹1.5–2 लाख वाले 4,46,832।
दो नियम इसमें दिलचस्प थे, और इन्हीं से सबसे ज्यादा शिकायतें आईं। एक — परिवार की पहचान राशन कार्ड से हुई, इसलिए एक घर में दो वयस्क किसानों के अलग-अलग कर्ज होने पर भी सीमा एक ही परिवार की मानी गई। दो — एक परिवार में कई लोन होने पर महिला का लोन पहले माफ किया गया। यह योजना 12 दिसंबर 2018 से 13 दिसंबर 2023 के बीच के short-term फसल ऋण पर लागू थी। नाम छूट गया था तो नई लिस्ट का इंतजार मत करें — clw.telangana.gov.in पर रिकॉर्ड देखें और जिला कृषि कार्यालय में लिखित शिकायत करें।
UP का सच — पुरानी योजना, नए नाम से बेची जा रही है
UP में “किसान कर्ज माफी योजना 2026” नाम से जो चीज घूम रही है, वह असल में किसान ऋण मोचन योजना है — जो 2017 में शुरू हुई थी। उसका दायरा भी तय है: छोटे और सीमांत किसान (2 हेक्टेयर तक), ₹1 लाख तक का फसल ऋण, और कर्ज 31 मार्च 2016 तक बकाया होना चाहिए। यानी 2026 में नया लोन लेकर इस योजना में आने का सवाल ही पैदा नहीं होता। जो कुछ होता है वह सिर्फ छूट गए या विवादित पुराने केसों का निपटारा है।
एक practical बात — UP का पोर्टल (upkisankarjrahat.upsdc.gov.in) बहुत बार खुलता ही नहीं। यह पेज लिखते समय भी वह जवाब नहीं दे रहा था। इसे “सर्वर पर लोड क्योंकि नई लिस्ट आ गई” वाली अफवाह का सबूत नहीं मानना चाहिए। पोर्टल न खुले तो सीधे अपनी बैंक ब्रांच या तहसील में पता करें — रिकॉर्ड वहीं है। विस्तार से UP किसान कर्ज राहत लिस्ट वाला पेज देख लीजिए।
यह सब होता क्यों है — दो मिनट का background
कर्ज माफी का सिलसिला नया नहीं है। 1990 में ARDRS आई थी, जिसमें प्रति किसान ₹10,000 तक की राहत थी और कुल खर्च ₹10,000 करोड़। 2008 में ADWDRS आई — ₹52,500 करोड़, मुख्य रूप से 5 एकड़ तक वाले किसानों के लिए। 2014 के बाद यह काम राज्यों के हाथ में चला गया, और अलग-अलग राज्यों ने मिलाकर लगभग ₹2.5 लाख करोड़ की घोषणाएं कीं — 2016-17 की GDP का करीब 1.4%।
RBI के एक internal working group ने 2019 में जो बात लिखी, वह किसान के लिए काम की है: waiver की घोषणाओं और राज्य चुनावों के बीच गहरा रिश्ता दिखता है। इसका मतलब यह नहीं कि योजना झूठी होती है — तेलंगाना और महाराष्ट्र दोनों में पैसा असली गया है। मतलब सिर्फ इतना है कि टाइमिंग राजनीतिक होती है, जरूरत के हिसाब से नहीं। इसलिए पूरी planning waiver पर टिकाना जोखिम है। जो किसान 2019 से “अगले साल माफ हो जाएगा” सोचकर किस्त रोकता रहा, उसका ब्याज बढ़ता गया और खाता NPA में चला गया।
फर्जी लिस्ट वाली साइटें — pattern पहचानिए
कर्ज माफी के नाम पर ठगी अब काफी सफाई से होती है। साइट सरकारी जैसी दिखती है, अशोक स्तंभ लगा होता है, “नई सूची जारी” लिखा होता है। कुछ निशानियां याद रखिए:
- डोमेन gov.in नहीं है। सरकारी पोर्टल हमेशा gov.in या nic.in पर होता है।
- OTP मांगा जा रहा है। लिस्ट देखने के लिए OTP की जरूरत कभी नहीं पड़ती।
- कोई फीस या QR code। ₹99, ₹200, कुछ भी। सरकारी लिस्ट मुफ्त है।
- “फॉर्म भरो, कर्ज माफ होगा”। महाराष्ट्र जैसी योजना में तो फॉर्म ही नहीं होता।
- WhatsApp पर PDF। “आपके गांव की लिस्ट” वाली PDF में अक्सर APK download का लिंक होता है, जो फोन से OTP पढ़ता है।
योजना नहीं है तो क्या करें — चार असली रास्ते
ज्यादातर किसान इस पेज पर इस उम्मीद में आते हैं कि उनका कर्ज माफ होगा। ईमानदारी से: अगर आपका राज्य लिस्ट में नहीं है, तो संभावना कम है। पर कर्ज के साथ जीने के रास्ते हैं, और वे waiver से ज्यादा भरोसेमंद हैं।
- One Time Settlement (OTS) — जब खाता NPA हो गया हो। बैंक एक बार में settle करने पर कुछ हिस्सा छोड़ देता है। आवेदन लिखित में दें, और settlement के बाद No Dues Certificate लेना मत भूलें।
- Restructuring / rescheduling — फसल खराब हुई हो और जिले में गिरदावरी या अन्नावरी घोषित हुई हो तो KCC को term loan में बदलने या moratorium देने का प्रावधान होता है। यह माफी नहीं, सांस लेने का वक्त है।
- Interest subvention — समय पर चुकाने वाले किसान को फसल ऋण 4% पर पड़ता है। पूरा हिसाब KCC लिमिट वाले पेज पर है।
- लिमिट बढ़वाना — कई बार दिक्कत कर्ज की नहीं, कम लिमिट की होती है। जमीन के हिसाब से लिमिट बढ़वाने पर साहूकार से उधार लेने की मजबूरी खत्म होती है।
घोषणा हो जाए तो पहले यह करें
घोषणा और अमल के बीच अक्सर कई महीने होते हैं। उस बीच तीन काम कर लें। पहला — बैंक पासबुक और लोन statement की कॉपी निकाल लें, क्योंकि cut-off तारीख वाले outstanding पर ही सब तय होता है। दूसरा — आधार, खाता और जमीन के रिकॉर्ड में नाम एक जैसा है या नहीं, यह मिलाएं; लिस्ट से नाम छूटने की सबसे आम वजह mismatch होती है। तीसरा — GR या government order का नंबर नोट कर लें, क्योंकि ब्रांच में योजना का नंबर बोलना और “टीवी पर देखा था” बोलना, दोनों का असर अलग होता है।
और हां — कर्ज माफी के इंतजार में चल रही किस्त रोकना सबसे महंगा फैसला है। किस्त रुकती है तो ब्याज चढ़ता है, खाता NPA में जाता है, और अगला लोन बंद हो जाता है। नोटिस आ चुका है तो recovery notice वाला पेज पढ़ लें — उसमें जवाब देने का तरीका लिखा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या 2026 में कोई राष्ट्रीय किसान कर्ज माफी योजना चल रही है?
नहीं। खेती का कर्ज माफ करना राज्यों का काम है, केंद्र का नहीं। पूरे देश के लिए आखिरी बार 2008 में waiver आया था, उससे पहले 1990 में। उसके बाद जो भी कर्ज माफी हुई, किसी एक राज्य ने अपने बजट से की। इसलिए जब कोई साइट "PM Kisan Karj Mafi Yojana form" दिखाए, तो समझ जाइए कि नाम ही गलत है।
कर्ज माफी लिस्ट में अपना नाम कहां देखें?
सिर्फ अपने राज्य के official portal पर, और वह भी तब जब उस राज्य की योजना असल में चल रही हो। महाराष्ट्र के लिए mjpsky.maharashtra.gov.in, UP के लिए upkisankarjrahat.upsdc.gov.in, तेलंगाना के लिए clw.telangana.gov.in। इनके अलावा जो भी "लिस्ट चेक करें" वाली साइट मिले, वह सरकारी नहीं है। लिस्ट देखने का कोई शुल्क नहीं होता और OTP कभी नहीं मांगा जाता।
मेरे राज्य में योजना नहीं है, KCC default हो गया है — अब क्या रास्ता है?
Waiver का इंतजार सबसे खराब विकल्प है, क्योंकि उसका कोई भरोसा नहीं। बैंक से दो चीजें पूछिए: One Time Settlement (OTS) और restructuring। OTS में बाकी रकम एक बार में कम करके settle होती है; restructuring में किस्त की अवधि बढ़ जाती है या moratorium मिलता है — खासकर जब फसल खराब हुई हो और जिले में गिरदावरी/अन्नावरी घोषित हुई हो। दोनों के लिए आवेदन लिखित में दें और receiving लें।
कर्ज माफ हो गया तो CIBIL ठीक हो जाता है?
तुरंत नहीं। Waiver के बाद बैंक खाते को settled/closed दिखाता है, और credit report पर वह entry कुछ साल रहती है। "Settled" और "closed" में फर्क होता है, और आगे लोन लेते समय बैंक यही देखता है। Waiver के बाद बैंक से No Dues Certificate जरूर लें, और 60-90 दिन बाद अपनी credit report खुद देखें कि खाता update हुआ या नहीं।
Sources
- महात्मा ज्योतिराव फुले शेतकरी कर्जमुक्ती योजना — सहकार विभाग, महाराष्ट्र शासन: mjpsky.maharashtra.gov.in
- तेलंगाना Crop Loan Waiver — कृषि विभाग: clw.telangana.gov.in
- UP किसान ऋण मोचन योजना: upkisankarjrahat.upsdc.gov.in
- RBI Internal Working Group on Agricultural Credit (2019)।
अंतिम अपडेट: 18 अगस्त 2026
