ट्रैक्टर सब्सिडी 2027 — किस राज्य में कितनी छूट? पूरी लिस्ट
KisanStatus Editorial Team · अपडेटेड: 9/8/2026
“ट्रैक्टर पर 50% सब्सिडी” — यह line आपने YouTube thumbnails और डीलर के मुंह से सौ बार सुनी होगी। सच क्या है? सब्सिडी असली है, schemes भी असली हैं — लेकिन कितनी मिलेगी, किसे मिलेगी और कब मिलेगी, यह तीनों बातें आपके राज्य और आपकी श्रेणी पर टिकी हैं। कोई एक “PM Tractor Yojana” नाम की central scheme नहीं है जो सबको आधे दाम पर ट्रैक्टर दे। जो है, वह इससे थोड़ा जटिल — पर काम का — system है। चलिए बिना घुमाए समझते हैं।

सब्सिडी का असली ढांचा — दो परतें
ट्रैक्टर सब्सिडी दो जगह से चलती है। पहली परत केंद्र की SMAM (Sub-Mission on Agricultural Mechanization) — यह कृषि यंत्रीकरण की umbrella scheme है जिसके पैसे से राज्य अपने किसानों को यंत्रों पर अनुदान देते हैं। दूसरी परत राज्यों की अपनी yantra anudan schemes — MP की e-कृषि यंत्र अनुदान योजना, बिहार की कृषि यांत्रिकीकरण योजना, राजस्थान की कृषि यंत्र अनुदान योजना, वगैरह।
सारांश साफ है — आवेदन हमेशा अपने राज्य के portal पर होता है, पैसा DBT से खाते में आता है, और नियम राज्य तय करता है। इसके चलते UP के किसान और बिहार के किसान को एक ही ट्रैक्टर पर अलग-अलग रकम मिलती है।
किस श्रेणी को कितना प्रतिशत?
SMAM guidelines के हिसाब से मोटा गणित यह है — exact स्लैब राज्य और मशीन के हिसाब से घटता-बढ़ता है:
- ▸सामान्य वर्ग — ज्यादातर राज्यों में करीब 25% से 40% तक।
- ▸SC / ST किसान — ऊंचा स्लैब, कई राज्यों में 50% तक। जाति प्रमाण-पत्र जरूरी।
- ▸महिला किसान — priority category। जमीन महिला के नाम हो तो उसी के नाम से आवेदन करना फायदे का सौदा है।
- ▸लघु-सीमांत किसान — (सीमांत = 1 हेक्टेयर तक, लघु = 2 हेक्टेयर तक) — इन्हें भी higher slab मिलता है, खतौनी/land record से साबित होता है।
राज्यवार — कहां, किस portal पर आवेदन?
नीचे बड़े कृषि राज्यों की स्थिति है। Portal के नाम और रास्ते बदलते रहते हैं, तो हर card में सीधा तरीका भी लिखा है — आवेदन window खुली है या नहीं, यह portal पर जाकर ही confirm करें।
पूरा विवरण नीचे है, पर पहले यह तालिका — किस राज्य में किस portal पर जाना है और चयन कैसे होता है, यह सामने रख लीजिए:
| राज्य | कहां आवेदन | चयन कैसे |
|---|---|---|
| उत्तर प्रदेश | upagriculture.com — “यंत्र पर अनुदान” | Token booking — window जल्दी भरती है |
| बिहार | farmech.bih.nic.in (OFMAS) | श्रेणीवार स्लैब; CHC पर अलग रास्ता |
| मध्य प्रदेश | dbt.mpdage.org — e-कृषि यंत्र अनुदान | Lottery, फिर करीब 10 दिन की खरीद-window |
| राजस्थान | rajkisan.rajasthan.gov.in — जन आधार से login | श्रेणीवार स्लैब, सालाना target |
| महाराष्ट्र | mahadbt.maharashtra.gov.in | पहले-आओ-पहले-पाओ / lottery mix |
| हरियाणा | agriharyana.gov.in — notification/scheme section | Window-based; MFMB registration जरूरी |
| छत्तीसगढ़ | CHAMPS system (CG Seed & Agri Dev. Corp.) | खरीद + bill जमा करने पर DBT |
तालिका का तीसरा खाना खास ध्यान से पढ़िए। Lottery वाले राज्य में जल्दी आवेदन करने से कोई बढ़त नहीं मिलती — वहां मायने यह रखता है कि नाम निकलने के बाद की न्यूनतम window में आपके कागज और बजट तैयार हों। Token वाले राज्य में उलटा है — वहां booking खुलने के पहले घंटे ही निर्णायक होते हैं। अपने राज्य का तरीका पहले पहचान लीजिए, फिर तैयारी उसी हिसाब से कीजिए।
हरियाणा में कृषि विभाग समय-समय पर यंत्रों/ट्रैक्टर पर अनुदान की schemes निकालता है — पिछले सालों में SC किसानों के लिए और electric tractor पर अलग से schemes आई हैं। यहां window-based system है — विभाग की website के notification/scheme section पर नजर रखिए।
Window कितनी छोटी और रकम कितनी बड़ी हो सकती है — इसका ताजा और दर्ज उदाहरण हरियाणा से ही है। जनवरी 2026 में किसान कल्याण विभाग ने SC किसानों के लिए 2025-26 की Tractor Subsidy Scheme के online आवेदन खोले — 45 HP या उससे ऊपर के ट्रैक्टर पर ₹3 लाख प्रति unit तक का अनुदान, शर्त यह कि किसान Meri Fasal Mera Byora portal पर registered हो और जमीन उसके (या Parivar Pehchan Patra में दर्ज परिवार के सदस्य के) नाम हो (स्रोत: Millennium Post की रिपोर्ट)। आवेदन की आखिरी तारीख 15 जनवरी थी — notification से deadline तक मुश्किल से कुछ हफ्ते। जो किसान पहले से MFMB पर registered थे और कागज तैयार रखे थे, उन्हीं के लिए यह खिड़की काम आई — बाकियों के लिए अगले साल का इंतजार। सबक सीधा है: इस scheme में तैयारी window खुलने से पहले होती है।
SMAM / Farm Machinery DBT Portal
Direct Benefit Transfer in Agriculture Mechanization
आवेदन की process — लगभग हर राज्य में यही ढर्रा

- अपने राज्य के portal पर किसान registration करो — आधार, mobile (आधार से linked), बैंक खाता।
- Scheme window खुलने पर ट्रैक्टर/यंत्र चुनकर आवेदन डालो, documents upload करो।
- चयन हुआ (token/lottery/approval) तो empanelled डीलर से ही खरीदो — quotation पहले ले लो।
- Bill, ट्रैक्टर के साथ photo और कागज portal पर upload करो — फिर physical verification होता है।
- Verification पास होते ही सब्सिडी DBT से बैंक खाते में आती है।
कागज कौन-कौन से लगेंगे?

आधार कार्ड (mobile linked) · खतौनी/जमीन का record · बैंक passbook · passport photo · जाति प्रमाण-पत्र (SC/ST स्लैब के लिए) · डीलर का quotation। कुछ राज्य निवास प्रमाण-पत्र भी मांगते हैं। सब PDF/JPG में पहले से scan करके रखिए — window छोटी होती है, कागज ढूंढने में token निकल जाता है।
Form reject क्यों होते हैं — 4 आम गलतियां
- आधार-खतौनी में नाम का फर्क — spelling तक मिलनी चाहिए। फर्क है तो पहले तहसील/आधार केंद्र से सुधार, फिर आवेदन।
- गैर-empanelled डीलर से खरीद — दर्दनाक गलती: पैसा भी गया, सब्सिडी भी। खरीद से पहले portal पर डीलर की listing खुद check करें।
- Deadline चूकना — token/lottery के बाद खरीद और bill upload की समय-सीमा सख्त होती है। डीलर से delivery की तारीख लिखवा कर लें।
- बैंक खाता आधार से seeded नहीं — verification पास, पर DBT fail। आवेदन से पहले NPCI seeding check कर लें।
मिनी ट्रैक्टर बनाम बड़ा ट्रैक्टर — सब्सिडी का गणित किसमें बैठता है?
एक बात जो आवेदन से पहले सोच लेनी चाहिए — सब्सिडी के नियम अक्सर छोटी मशीनों के पक्ष में झुके होते हैं। कई राज्यों में मिनी ट्रैक्टर (20 HP से नीचे) और power tiller पर प्रतिशत ऊंचा बैठता है — महाराष्ट्र के MahaDBT में, मिसाल के तौर पर, मिनी ट्रैक्टर-वर्ग पर 40-50% का दायरा और power tiller पर अलग cap चलती रही है। वजह सीधी है — योजना का मकसद छोटे-सीमांत किसान तक मशीन पहुंचाना है, showroom का महंगे-से-महंगा model बिकवाना नहीं।
खरीद से पहले अपनी जोत से मिलाकर सोचिए। 1-3 एकड़ की खेती में 12-15 HP का मिनी ट्रैक्टर अक्सर काम निकाल देता है — दाम आधे से भी कम, diesel खर्च कम, और सब्सिडी का प्रतिशत अक्सर बेहतर। 3-5 एकड़ पर 15-20 HP का गणित बैठता है। बाग/अंगूर वाली कतारों की खेती में compact tractor देखिए। और अगर जोत इतनी छोटी है कि साल में ट्रैक्टर 30-40 दिन ही चलेगा, तो ईमानदारी से हिसाब लगाइए — कई बार खरीदने से सस्ता किराए पर लेना पड़ता है, भले यह बात सुनने में अच्छी न लगे।
सब्सिडी + लोन का combo — असली बचत यहीं है
मान लीजिए 6 लाख का ट्रैक्टर है और आपको 1 लाख की सब्सिडी approve हुई। बाकी 5 लाख के लिए बैंक से ट्रैक्टर लोन लीजिए — margin money कम लगेगी और EMI संभालने लायक रहेगी। कौन सा बैंक, कितना down payment, कितनी ब्याज दर — इस पर हमारी अलग ट्रैक्टर लोन guide है। और अगर हिसाब लगाकर लगे कि ट्रैक्टर खरीदना ही भारी है, तो CHC portal से किराये पर मशीन लेना भी एक रास्ता है — बहुत से छोटे किसानों के लिए यही सस्ता पड़ता है।
आवेदन से खाते में पैसा आने तक — पूरा सफर कितना लंबा है?

एक realistic scenario से समझिए कि इंतजार किस चीज का कितना होता है। Window खुली और आपने पहले ही दिन आवेदन डाल दिया — अच्छी शुरुआत। अब चयन (token/lottery) का इंतजार — यह कुछ दिनों से कुछ हफ्तों तक खिंच सकता है, राज्य के schedule पर निर्भर। चयन हुआ तो खरीद की सख्त खिड़की — अक्सर 10-15 दिन — डीलर और पैसे का इंतज़ाम पहले से सोच कर रखिए। Bill upload के बाद physical verification की बारी — अधिकारी के दौरे के हिसाब से कुछ हफ्ते लग सकते हैं। और आखिर में DBT — verification के बाद सब्सिडी खाते में आने में कुछ हफ्तों से कुछ महीने तक।
कुल मिलाकर — आवेदन से पैसा आने तक का सफर आराम से एक से तीन महीने (कभी ज्यादा) खा जाता है। इस दौरान पूरी कीमत आपकी जेब/loan से जा चुकी होती है — cash-flow की planning में सब्सिडी को “बाद में आने वाली राहत” मानिए, down payment का हिस्सा नहीं। जो डीलर “सब्सिडी काटकर बाकी दे दो” बोले, वह या तो scheme समझा नहीं या आपको घुमा रहा है — सब्सिडी डीलर को नहीं, DBT से सीधे आपके खाते में आती है।
खरीद से पहले डीलर से पूछने वाले 4 सवाल
Showroom पहुंचने से पहले ये सवाल लिख कर ले जाइए — और जवाब मौखिक नहीं, quotation पर लिखे हुए लीजिए। पहला — क्या आप इस scheme के लिए empanelled हैं, और किस portal-listing के नाम से? दूसरा — इस model की सरकारी approved cost क्या है, और on-road कीमत उससे कितनी अलग है? तीसरा — bill में ट्रैक्टर, accessories और insurance अलग-अलग दिखेंगे या जोड़कर? (सब्सिडी सिर्फ मूल मशीन पर बनती है।) चौथा — delivery और bill की तारीख क्या होगी? जो डीलर इन चारों का सीधा जवाब न दे, वहां से quotation लेकर आगे बढ़ जाइए — empanelled डीलर एक से ज्यादा होते हैं।
लोग कहां ठगे जाते हैं — पैसा देने से पहले पढ़िए
ठगी का पुराना नुस्खा आज भी चल रहा है — “PM Kisan Tractor Yojana” नाम से बनी फर्जी websites और forms, जो registration fee के नाम पर ₹500-₹5,000 तक मांगती हैं। याद रखिए — इस नाम की कोई अलग central scheme है ही नहीं; जो है वह SMAM और राज्यों की योजनाएं हैं, और उनका आवेदन सिर्फ सरकारी (.gov.in / .nic.in) portal पर होता है। दूसरा नुस्खा डीलर-लेवल का है — “सब्सिडी कटवाकर आधे दाम में दे दूंगा, बस कुछ advance दे दो”। ऊपर पढ़ चुके हैं — सब्सिडी डीलर को नहीं मिलती, DBT से आपके खाते में आती है। तीसरा — lottery में “नाम डलवा देने” का दावा करने वाले — चयन computer से random होता है, कोई अंदर से नाम नहीं चढ़ा सकता। इन तीनों में से कोई भी बात सुनें तो समझ जाइए सामने वाला आपकी जेब देख रहा है, आपका खेत नहीं।
सीधी सलाह — तीन बातें याद रखिए
पहली — सब्सिडी मिलती है, पर window में आवेदन करने वालों को, इसके चलते अपने राज्य के portal का notification section महीने में एक बार जरूर देखिए। दूसरी — श्रेणी के हिसाब से जो higher slab बनता है, उसके प्रमाण-पत्र पहले से तैयार रखिए। तीसरी — जो बात portal पर नहीं लिखी, वह किसी की भी जुबान से सुनकर मत मानिए। बस यही तीन आदतें आपको उन हजारों आवेदकों से आगे रखेंगी जिनका form हर साल कागज की कमी से reject होता है।